अड्डा बाजार। महुअवा अड्डा राम जानकी मंदिर परिसर के रामलीला में कलाकारों ने राम वन गमन से केवट संवाद तक का मंचन किया। जटायु और राम का संवाद मनमोहक रहा। मंचन का उद्घाटन कृष्ण कुमार उर्फ पप्पू पांडेय और राजकुमार जायसवाल ने किया।
राज दरबार में राजा दशरथ ने राम के राजतिलक की घोषणा की। अयोध्या में खुशियां मनाई जाने लगी। यह बात मंंथरा को नागवार लगी। उसने कैकई को बहका दिया। नतीजतन मंथरा की बातों में आकर कैकई कोप भवन में चली गईं।
राजा दशरथ कैकई को मनाने पहुंचे। कैकई ने दशरथ से पूर्व के दो वचन मांगे, जिसमें भरत का राजतिलक और राम को तपस्वी वेश में वनवास भेजना शामिल था। पिता के वचन पूर्ण करने राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन चले गए। राम के वियोग में दशरथ ने कैकई का परित्याग करते हुए अपने प्राण त्याग दिए।
वन जाने के दौरान राम, लक्ष्मण, सीता सुरसर नदी के तट पर पहुंचे। वहां केवट ने शर्त रखा कि बगैर राम के पांव धुले अपने नांव में नहीं बैठाएगा। केवट की राम भक्ति देखकर दर्शक भावुक हो गए।
जबकि, कॉमेडियन कलाकार ने दर्शकों को खूब हंसाया। उसके बाद राम की मुलाकात जटायु से हुई। जटायु ने अपने को राजा दशरथ का मित्र बताया। राम लक्ष्मण सीता ने जटायु को काका श्री कहकर प्रणाम किया। इस मौके पर ग्राम प्रधान नरेंद्र सिंह, जसवंत सिंह, विवेक सिंह, वीरेंद्र चौधरी आदि रहे।