महराजगंज। शिक्षा में आईसीटी (इनफार्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) के उपयोग के लिए यूनेस्को किंग हमद बिन ईसाअल-खलीफा पुरस्कार के लिए पांच तक आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए एनसीईआरटी की ओर प्रदेश के सभी जिलों के डायट प्राचार्य को इंटर कॉलेजोें और परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों को इसमें प्रतिभाग करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
बहरीन साम्राज्य के सहयोग से 2005 में स्थापित, यह पुरस्कार उन व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है जो उत्कृष्ट परियोजनाएं लागू कर रहे हैं और डिजिटल युग में सीखने, सिखाने और समग्र शैक्षिक प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के रचनात्मक उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय जूरी प्रतिवर्ष दो सर्वश्रेष्ठ परियोजनाओं का चयन करती है। पेरिस में यूनेस्को मुख्यालय में एक समारोह के दौरान प्रत्येक विजेता को 25,000 अमेरिकी डॉलर, एक पदक और एक डिप्लोमा मिलता है। हर साल पुरस्कार का एक विशिष्ट विषय होता है, जो यूनेस्को के जनादेश और मूल्यों के अनुरूप होने के साथ-साथ सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की वकालत करता है।
इस वर्ष पुरस्कार का 2023 संस्करण लांच किया गया है। इसके लिए आवेदन और नामांकन की अंतिम तिथि पांच फरवरी निर्धारित की गई है। 2023 के लिए ''हरित शिक्षा के लिए डिजिटल लर्निंग'' थीम का निर्धारण किया गया है। यूनेस्को आईसीटी इन एजुकेशन प्राइज के 2023 संस्करण का उद्देश्य डिजिटल लर्निंग और ग्रीनिंग एजुकेशन के बीच तालमेल का पता लगाना है, जो 2022 में हुए ट्रांसफॉर्मिंग एजुकेशन समिट के दौरान रेखांकित किए गए दो प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं।
गौरतलब है कि डिजिटल लर्निंग, पहुंच का विस्तार करने और सीखने की गुणवत्ता में सुधार करने की अपनी क्षमता के साथ, शिक्षार्थियों को जलवायु परिवर्तन पर ज्ञान, कौशल, मूल्यों और दृष्टिकोण से लैस करने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र के वितरण के लिए एक अवसर प्रदान करता है।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य अभिजीत सिंह ने बताया कि इसके बारे में जानकारी दी जा चुकी है। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थी को पुरस्कार मिलेगा।