महराजगंज। जिले में संचालित होम्योपैथी अस्पताल में इलाज की स्थिति बदहाल है, चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को उपचार के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में भटकना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों की पीड़ा कोई सुनने वाला नहीं है।
जिले में संचालित होने वाले 26 होम्योपैथी अस्पताल में महज 5 डॉक्टरों की तैनाती है। जबकि एक अस्पताल में एक चिकित्सक की नियुक्ति प्रावधान है। अन्य अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। हॉस्पिटल में दवाओं का टोटा है, जबकि विभाग की ओर से दवाएं भरपूर होने का दावा किया जाता है। इससे लोगों को होम्योपैथी का बेहतर इलाज मिलने की मंशा पर पानी फिर गया है। मीठी गोलियों से लोगों की बीमारी को दूर करने के वाला विभाग स्वयं की बीमारी को दूर करने में असफल है। इसके बेहतर इलाज के लिए कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं है।
जिला होम्योपैथ अधिकारी कार्यालय के मुताबिक जनपद में गोधवल, भिटौली, पिपरपाती, खुशहालनगर, बरियारपुर, लक्ष्मीपुर, चिऊटहां, सिसवां, कटहरी, झुलनीपरु, सिंदुरियां, समरधीरा, औसानी, फरेंदा, कांध, बरगाहपरु, बृजमनगंज, सहजनवां बाबू, रामनगर, बाली, नौतनवां, सोनौली, पिपरवास, मनिकापुर, जिला मुख्यालय और घुघली में होम्योपैथी अस्पताल संचालित है। पिपरपाती, चिऊटहां, बृजमनगंज, घुघली में अस्पताल किराए के भवन में संचालित हो रहा है। जबकि अन्य अस्पताल सरकारी भवन में चल रहा है। अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी के 37 कर्मचारी और 25 फार्मासिस्ट तैनात हैं, जो कि मानक के अनुसार है। चेहरी के रहने वाले गोविंद मणि ने बताया कि होम्योपैथी अस्पताल पर डॉक्टर के न रहने के कारण दवा कराने में परेशानी होती है।
जिला मुख्यालय पर अस्पताल में दवा के लिए आना पड़ता है। होम्योपैथी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिए जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। बरियारपुर के नरेश कहते हैं कि होम्योपैथी अस्पताल आने पर डॉक्टर मिलते ही नहीं हैं। इससे मजबूरन प्राइवेट अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है। वहीं जिला होम्योपैथी अधिकारी का दावा है कि जिले के सभी अस्पताल में दवा उपलब्ध है। जिला होम्योपैथी अधिकारी डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि जो संसाधन उपलब्ध है, उसी में बेहतर इलाज करने का प्रयास जारी है। जहां डॉक्टरों के कमी की बात है तो यह शासन स्तर का मामला है। प्रयास यह रहता है कि सभी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले।