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Maharajganj News: उपचार सरकारी में, टांके के लिए भेजा निजी अस्पताल

Mon, 20 Jan 2025 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। जिला अस्पताल मेंं इलाज कराने आएं तो सतर्क रहें। यहां आसपास दलालों का नेटवर्क है। अगर कोई इनके झांसे में फंसा तो जेब खाली हो जाएगी। महुअवा महुई का एक युवक दलालों के जाल में फंस गया। अब उसकी जेब इलाज में खाली हो रही है।
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इससे नाराज होकर वह अपने गांव के कुछ लोगों के साथ ट्रामा सेंटर पर हंगामा कर रहा था। वह पूछ रहा था कि टांका लगाने के लिए निजी अस्पताल में क्यों भेजा गया, वहां अब तक 14000 रुपये का बिल बन चुका है। यह कौन देगा? महुअवा महुई गांव के विजय कुमार रविवार दोपहर में जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर पर गांव के कुछ लोग साथ पहुंचे थे। वह सवाल कर रहे थे, लेकिन बातों का जवाब देने वाला कोई नहीं था। विजय ने बताया कि पिता श्रीराम (65) का इलाज कराने शनिवार को शाम पांच बजे जिला अस्पताल पहुंचा था। बाइक की चपेट में आने से उनको सिर के नीचे चोट लगी है। आरोप है कि जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर लेकर आया तो डॉक्टर से 3500 रुपये का तीन इंजेक्शन बाहर से खरीदकर मंगाया गया।
इसके अलावा चार हजार रुपये का एक और इंजेक्शन खरीद कर लाया। इसी बीच एक युवक ट्रामा सेंटर में डॉक्टर से कुछ बातचीत किया। थोड़ी ही देर में डॉक्टर ने उस युवक कि ओर इशारा करते हुए कहा कि इनके साथ एंबुलेंस में जाइए, टांका लग जाएगा। विजय ने बताया कि जिला अस्पताल से थोड़ी ही दूरी पर निजी अस्पताल है। वहां एंबुलेंस वाला लेकर गया, इसके बाद उसका पता नहीं चल रहा है। निजी अस्पताल में टांका लगाकर भर्ती कर लिया गया है।
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सोचा की यहां से जिला अस्पताल भेज दिया जाएगा, लेकिन यहां तो 14000 रुपये का बिल बनकर तैयार हो गया है। यही बात पूछने के लिए जिला अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में आया तो कोई जवाब नहीं दे रहा है। दलाल ने डॉक्टर के साथ मिलकर बेवकूफ बनाया है। सरकारी अस्पताल में सस्ते में इलाज कराने आया तो महंगे इलाज में फंस गया है। इंजेक्शन भी दवा की दुकान से उधार लिया हूं।
विजय के साथ आए गांव के कुछ लोगों ने भी बदहाल व्यवस्था पर गुस्से का इजहार किया। लोगों ने कहा कि थोड़ी सी चूक हो जाए तो दलाल फंसा देंगे। सरकार ने सस्ते इलाज की सुविधा देने के लिए यह व्यवस्था की है, लेकिन दलालों की मनमानी से गरीबों की जेब ढीली हो रही है।
ट्रामा सेंटर कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है। उस वक्त डयूटी पर तैनात कौन था, इसके बारे में भी पता नहीं चल रहा है। सूत्रों की माने तो दलालों ने अस्पताल में गहरी पैठ बना रखी है। इस वजह से इनका नेटवर्क टूट नहीं रहा है। सीसीटीवी कैमरे से निगरानी भी बस नाम की रह गई है।
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