महराजगंज। जंगल सफारी में सैर करने के लिए पर्यटकों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। आने जाने के लिए लगी जिप्सी व अन्य गाड़ियां अब नहीं दिखती हैं। जंगल सफारी में जाने वाले पर्यटकों को निजी वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं। बदहाल व्यवस्था के कारण अब पर्यटकों की संख्या में कमी होने लगी है। शुरूआत में लोगों का आना लगा रहता था, लेकिन दो से चार की संख्या में भी पर्यटक कभी कभार आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार पूर्वांचल का पहला जंगल सफारी परवान चढ़ने से पहले ही बुझने लगा है। अब जंगल की सैर करने में रुचि लेने वाले लोग जंगल सफारी को भूल गए हैं। करीब डेढ़ वर्ष पहले शुरू हुई जंगल सफारी योजना फाइलों में सिमट कर रह गई है। दक्षिणी चौक रेंज के कुशमहवां बीट के पास सफारी करने के लिए टिकट काउंटर खोला गया था। टिकट काउंटर अभी है। लेकिन कभी कभार ही खुलता है। जंगल का सैर कराने के लिए लाई गई जिप्सी दिखाई नहीं देती है।
24 नर्सरी निवासी मनोज ने बताया कि वनटांगिया के लोगों को आश्वासन दिया गया था कि उनके रोजगार के साधन बढ़ेंगे। जंगल सफारी करने आने वाले पर्यटकों के लिए गाइड, जलपान के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री की व्यवस्था वनटांगिया वासियों के जिम्मे रहेगा। ऐसे में उनके रोजगार के साधन बढ़ेंगे। लेकिन यह सारी बातें ख्याली पुलाव साबित हो रही हैं। बलुअहिया निवासी गोवर्धन ने बताया कि जंगल सफारी की घोषणा होने के बाद काफी समय गुजर गया लेकिन कोई परिवर्तन नहीं हुआ। जंगल सफारी के लिए तय किए गए रूट पर अभी भी कोई कार्य नहीं हुआ है।
जंगल सफारी में आगे पुल टूटा हुआ है। ऐसे में पर्यटक जब पूरा भ्रमण करने नहीं पाएंगे तो गाड़ी की बुकिंग क्यों करेंगे। शुरूआत में पर्यटकों की संख्या अच्छी खासी रही, लेकिन अब कम लोग आ रहे हैं। वाहन समेत खर्चा भी निकलना मुश्किल है। करीब 20 बकाया भुगतान भी नहीं हुआ है।
राकेश कुमार गुप्ता, टूर ऑपरेटर, जंगल सफारी