बार्डर पर कैरियर की मदद से धंधे को अंजाम देने में जुटे हैं धंधेबाज
बार्डर क्षेत्र में कॉफी बरामद के बाद तस्करी की खुली पोल
कर्नाटक के कॉफी की ओर आकर्षित हो रहे नेपाली...बढ़ी तस्करी
निचलौल। नेपाल सरहद पर इन दिनों कॉफी की तस्करी काफी बढ़ चुकी है। इस धंधे में धंधेबाजों को ढाई गुना तक मुनाफा हो रहा है। बीते दिनों सरहद से सटे लक्ष्मीपुर खुर्द गांव से 50 बोरी कॉफी बरामद की गई थी। बताया जा रहा है कि धंधेबाज कर्नाटक से सस्ते कीमत पर ट्रांसपोर्ट के जरिए कॉफी का बीज मंगाते हैं। कैरियरों की मदद से सरहद पार कर ढाई गुना मुनाफा कमा लेते हैं। कर्नाटक की उच्च गुणवत्ता वाली कॉफी की ओर नेपाली आकर्षित होने लगे हैं। धंधेबाज कॉफी को कर्नाटक के बाजार से 200 से 250 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदते हैं। नेपाल पहुंचने के बाद यह 600 से 700 रुपये में बिक जाता है।
जानकारी के मुताबिक, भारत के कर्नाटक में कॉफी उच्च गुणवत्ता की पाई जाती है। अधिकांश कॉफी जैविक उत्पादित होती है। इसका स्वाद भी बेहद अच्छा होता है। यही कारण है कि नेपाल के लोग कर्नाटक के कॉफी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कॉफी में मौजूद कैफीन मस्तिष्क को उत्तेजित करने के साथ ही संज्ञानात्मक कार्यों और याददाश्त में सुधार कर सकता है। यह लोगों को दिन भर ऊर्जावान और सतर्क रहने में मदद करता है। धंधेबाज सरहद पर इसकी तस्करी कर मोटी रकम कमाने में कोई कोर कसर भी नहीं छोड़ रहे हैं। इस तस्करी की मुख्य वजह नेपाल कस्टम में लगने वाला भारी भरकम राजस्व शुल्क है।
सूत्रों के मुताबिक, नेपाल सरहद के लक्ष्मीपुर पुलिस चौकी से लेकर बरगदवा बाजार के बीच पगडंडियों पर इन दिनों कॉफी की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। धंधेबाजों की ओर से सीमावर्ती इलाकों में अवैध गोदाम भी बनाए गए हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां तस्करी का सामान भी बरामद कर रही हैं। लेकिन कभी कभार ही कैरियर सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगते हैं। मुख्य धंधेबाज सुरक्षा एजेंसियों के पकड़ से काफी दूर होते हैं। यही कारण है कि सामान के साथ कैरियरों को पकड़ने के बावजूद भी धंधेबाजों पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है।
निचलौल कस्टम अधीक्षक डीके अस्थाना ने बताया कि बार्डर इलाकों में कार्रवाई के दौरान बरामद अवैध सामानों को जांच-पड़ताल कर मानक के मुताबिक जुर्माना लगाया जाता है। फिर बरामद धनराशि को जुर्माना जमा करने वाले शख्स को सुपुर्द कर दिया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार धंधेबाजों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
कैरियरों पर शिकंजा, धंधेबाज बेखौफ
नेपाल बार्डर से सटे बहुआर बाजार के लोग बताते हैं कि एसएसबी व पुलिस की गिरफ्त में सिर्फ कैरियर ही आते हैं। यह कैरियर 500 से 1,000 रुपये के लिए धंधेबाजों का काम करते हैं। जबकि इससे जुड़े बड़े धंधेबाज बेखौफ होकर मुनाफा कमाते हैं। दोनों देशों में बैठे धंधेबाजों की करतूत जानने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझती हैं।
कॉफी की पैकिंग कर दी जाती है ब्रांडेड नाम
कॉफी के धंधे से जुड़े एक शख्स ने बातचीत में बताया कि कर्नाटक से कॉफी बीज बार्डर क्षेत्र में लाकर डंप कर दिया जाता है। फिर मौका मिलने पर कॉफी को कैरियरों के जरिये साइकिल और बाइक की मदद से नेपाल पहुंचा दिया जाता है। नेपाल पहुंचने पर कॉफी बीज की पिसाई कर पैकिंग कर दी जाती है। उक्त पैकिंग कॉफी को ब्रांडेड नाम देकर महंगे दामों में बेच दिया जाता है। ऐसा करने से धंधेबाजों को खरीद दाम से दस गुना मुनाफा आसानी से हो जाता है।
सरहद पर सख्त हुई सुरक्षा एजेंसियां
नेपाल सरहद पर लगातार बरामद हो रही कर्नाटक की कॉफी को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो चुकी हैं। बार्डर के मुख्य नाकों से लेकर पगडंडियों के रास्ते पर सुरक्षा एजेंसियों ने जांच-पड़ताल तेज कर दी है। प्रशासन की टीम भी सुरक्षा एजेंसियों के साथ रात में बार्डर इलाकों में गस्त करने में जुट गई है। मुखबिर की सूचना पर छापा मारने की भी कार्रवाई की जा रही है।