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Maharajganj News: रामग्राम में पर्यटन विकास को लगे पंख, जल संरक्षण भी

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रामग्राम का लैंडस्केपिंग जलाशय।
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वन्य क्षेत्र का आकर्षण है लकड़ी की बनी इमारत
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827.43 लाख रुपये से हो रहे पर्यटन विकास के कार्य
महराजगंज। चौक वन्य रेंज में किसी कालखंड का गवाह रामग्राम स्तूप क्षेत्र में चल रहे विकास से पर्यटन को पंख लग रहे हैं। यहां 827.43 लाख रुपये से मेडिटेशन सेंटर, रिसेप्शन, गेस्ट हाउस, लैडस्केपिंग जलाशय, घाट, सोलर पैनल से रोशनी का प्रबंध व परिक्षेत्र भ्रमण के लिए सड़क जैसे कार्य से सोहगीबरवां वन्य अभ्यारण का यह क्षेत्र विकसित हो रहा है। करीब 70 फीसदी कार्य हो चुके हैं।
तीन माह पहले जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने यहां जारी विकास कार्यों का जायजा लेकर जरूरी निर्देश दिए थे। इसके बाद से यहां के लैंडस्केप जलाशय में वर्षा जल संरक्षित के इंतजाम किए जा रहे हैं। चौक वन्य क्षेत्र के रामग्राम स्तूप के लिए माना जाता है कि इस स्तूप में भगवान बुद्ध के अस्थि का आठवां हिस्सा इसी स्तूप में संरक्षित है। स्थानीय लोग व प्रशासन की पहल पर नवंबर 2024 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने उत्खनन किया। सर्वे में शामिल पुरातत्वविद् डाॅ. आफताब हुसैन ने बताया कि सर्वे के समय निकले अवशेष प्रथम दृष्टया कुषाण व गुप्त काल के प्रतीत होते थे। हालांकि अभी प्राप्त अवशेषों का परीक्षण कार्बन डेटिंग व अन्य तथ्यों से जांचे जा रहे हैं। साक्ष्यों की अगर वैज्ञानिक पुष्टि हो जाएगी तो यह क्षेत्र प्रमाणित बौद्ध सर्किट दायरे में शामिल हो जाएगा।
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विकास के यह प्रारूप बने आकर्षण केंद्र
रामग्राम स्तूप परिसर में लैंडस्केपिंग जलाशय आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र है। इस जलाशय के चारों तरफ पक्की सीढ़ियों को इस तरह डिजाइन किया गया कि रामग्राम परिक्षेत्र में बारिश के बाद वर्षा का जल इसमें आसानी से संरक्षित हो सके। इसके अलावा कलात्मक मॉडल की लकड़ी से दो मंजिला इमारत भी आकर्षक है। बांस निर्मित यह इमारत बाहर और अंदर से काफी खूबसूरत है। इमारत की नींव पहले बालू, सीमेंट और अन्य सामग्रियों से तैयार की गई। दीवारों को मजबूत बनाने के लिए अंदर लोहे के पिलर लगाए गए हैं।
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वर्जन
रामग्राम परिक्षेत्र में पर्यटन विकास के कार्य तेजी से पूरे हो रहे हैं। लगभग 30 फीसदी कार्य शेष हैं। डीएम इस पर्यटन विकास पर नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर निर्देश देकर इसे एक अलग लुक देने का सार्थक प्रयास कर रहे हैं। प्रस्तावित सभी कार्य पूर्ण होने के बाद इसे बौद्ध सर्किट में शामिल कराने के प्रयास होंगे।
-प्रभाकर मणि, सहायक पर्यटन अधिकारी
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