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स्वास्थ्य 18-31-12

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अस्पताल में थायराइड जांच की सुविधा नहीं, निजी लैब का भरोसा
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महराजगंज। जिला अस्पताल के लैब में थायराइड जांच की सुविधा नहीं है। मरीजों को निजी लैब में रकम खर्च कर जांच करानी पड़ रही है। इसमें सर्वाधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है। महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 40 से अधिक महिलाएं इलाज कराने आती हैं। सदर सीएचसी में औसतन एक माह में 70 से 80 गर्भवती महिलाएं जांच कराने आती हैं। थायराइड जांच की सुविधा नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को रकम खर्च करनी पड़ती है।
जानकारी के अनुसार, जिले में 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। औसतन एक सीएचसी पर एक माह में 70 गर्भवती की जांच के हिसाब से सभी सीएचसी पर 1,050 गर्भवती महिलाएं जांच कराने जाती हैं, लेकिन इनको थायराइड जांच बाहर निजी लैब से करानी पड़ती है। इसी तरह महिला अस्पताल में एक माह में करीब 100 से अधिक महिलाएं जांच कराने पहुंचती हैं। यहां भी थायराइड जांच की सुविधा नहीं है।
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क्या है थायराइड
नमक में आयोडीन की कमी के कारण थायराइड की दिक्कतें होती हैं। डाक्टरों की सलाह से इसका उपचार व नमक में पर्याप्त आयोडीन लेने से परेशानी दूर हो जाती है। थायराइड के चलते शरीर में मोटापा समेत कई परेशानी होती है। डॉक्टर थायराइड जांच के लिए लिखते हैं। मरीजों की स्थाई आंकड़ा नहीं रखते हैं, क्योंकि यह उपचार के बाद ठीक हो जाता है।
निजी लैब में जांच कराने में 600 से 700 रुपये लग जाते हैं। अगर थायराइड जांच की सुविधा सरकारी अस्पताल में रहती तो समस्या नहीं होती। -किरन सिंह, दरौली
महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल है। थायराइड की जांच के लिए निजी लैब का सहारा है। -मनीषा, रमपुरवा
अन्य जांच तो अस्पताल में हो जाती है, लेकिन थायराइड की जांच के लिए बाहर जाना पड़ता है। निजी लैब में रकम ज्यादा खर्च करनी पड़ती है। -ऋतु, बागापार
सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में व्यवस्था बदहाल है। थायराइड जांच की सुविधा अस्पताल में नहीं होने से दिक्कत होती है। -प्रियंका, गंगराई
गर्भवती महिलाओं की थायराइड जांच जरूरी होती है। स्वास्थ्य जांच के दौरान अगर लक्षण दिखता है तो जांच कराने के लिए कहा जाता है। -डॉ. उर्वशी, महिला अस्पताल
जिले की सीएचसी पर थायराइड जांच की सुविधा नहीं है। जिला अस्पताल में जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सीएमएस से वार्ता की जाएगी। -डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ
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जिला अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं होने से नमूना जांच के लिए मेडिकल कालेज गोरखपुर भेजा जाता है। जांच रिपोर्ट आने में चार-पांच दिन लग जाते हैं। -डॉ.एएम भास्कर, सीएमएस
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