राप्तीनगर के कानापार घाट में नहाते समय बच्चियां डूब गईं। सूचना पर विधायक और प्रशासनिक अफसर पहुंचे।
- फोटो : प्रदीप अग्रहरि
राप्ती नदी के कानापर घाट पर पांच लड़कियां नहाने गईं। लेकिन उन्हें क्या पता था कि नदी का गहरा पानी उनकी जान के लिए काल बन जाएगा। शुक्र था कि गांव के तीन युवक पहुंच गए और अपनी जान पर खेल कर तीन को डूबने से बचा लिया। युवकों की बहादुरी की चर्चा क्षेत्र में होती रही। लेकिन इन फरिश्तों को दो अन्य बच्चियों के न बचा पाने का अफसोस सालता रहा।
कानापार की रहने वाली अर्चना और उसकी चचेरी बहन निकिता ने शनिवार को ही राप्ती नदी में नहाने की योजना बना ली थी। इस योजना में अर्चना नेे अपने साथ तीन सगी बहनें मुस्कान, खुशी और तन्नू को भी शामिल कर लिया। लेकिन भगवान ने कुछ और ही लीला रची थी। जानकारी के अनुसार, पहली बार नहाते समय खुशी डूब रही थी तो मुस्कान ने बचा लिया। सभी नहाकर सुरक्षित बाहर आ गई थीं। लेकिन पांचों जब दोबारा नहाने नदी में उतरीं तो अर्चना और चचेरी बहन निकिता डूबने लगीं और गहरे पानी में समा गईं। बाकी बची तीन बहनों के लिए रामकृष्ण, प्रदीप साहनी और संतोष अग्रहरि फरिश्ते बनकर आए और उन्हें डूबने से बचा लिया।
अर्चना के पिता नेपाल में और निकिता के पिता बुटवल में काम करते हैं। उन्हें जब अपनी बच्चियों की मौत की खबर मिली तो वे स्तब्ध थे। एक साथ दो बेटियों की अर्थी निकली तो आसपास के लोगों की भी सिसकियां नहीं रुकीं। घटना की सूचना के बाद एडीएम कृपा शंकर, विधायक विनोद मणि तिवारी और प्रशासनिक अमला गांव में पहुंच गया।भाजपा के छठ्ठू सिंह, ब्लाक प्रमुख महबूब आलम, कानापार के ग्राम प्रधान गोपाल सिंह, चौकी इंचार्ज रामशरण त्रिपाठी ने चिंता जताई।