- पांच बच्चों में तीन को रिश्तेदारों के घर पालने की मजबूरी
- पेंटिंग-मजदूरी की कमाई से जैसे-तैसे चलता था घर
महराजगंज। गरीबी से जूझ रहे परिवार की जिंदगी में मंगलवार की शाम ऐसा हादसा हुआ जिसने घर की बची-खुची खुशियां भी छीन लीं। पांच बच्चों की मां पूनम देवी (48) अपने छोटे बेटे विपिन (8) और बेटी सुहानी (6) के साथ मायके से ससुराल लौट रही थीं। पकड़ी जंगल के पास ऑटो से उतरने के बाद तीनों पैदल गांव की ओर बढ़े, लेकिन बोकड़ा देवी स्थान के पूरब नदाव नाले में नाव का संचालन बंद होने के कारण घर पहुंचने की मजबूरी में पानी में उतर गए। अचानक गहरे गड्ढे में पैर पड़ने से दोनों बच्चे डूबने लगे। उन्हें बचाने के प्रयास में मां भी गहरे पानी में समा गईं। बुधवार को नाले में तीनों के शव मिलने की खबर पहुंची तो परिवार में चीख-पुकार मच गई।
पूनम के पति मोहित पुणे में पेंटिंग और मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आमदनी के कारण पांचों बच्चों की परवरिश भी मुश्किल से हो रही थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि बड़ी बेटी भगवानी (21) और अनीता (12) बुआ के घर, जबकि पूजा (19) नानी के घर रहती थीं।
मंगलवार को पूनम अपने मायके गई थीं। वहां नए मकान की छत पड़ रही थी। दोपहर करीब दो बजे वह विपिन और सुहानी के साथ ससुराल के लिए निकलीं। पकड़ी जंगल के पास ऑटो से उतरने के बाद तीनों गांव की तरफ पैदल चल पड़े। शाम होने तक जब वे बोकड़ा देवी स्थान के पूरब नदाव नाले के पास पहुंचे तो नाव का संचालन बंद हो चुका था। घर पहुंचने की मजबूरी में पूनम दोनों बच्चों के साथ नाले में उतर गईं।
इसी दौरान नाले में अचानक गहरे गड्ढे में पैर पड़ने से बच्चे पानी में डूबने लगे। पूनम ने दोनों को बचाने का प्रयास किया लेकिन पानी की गहराई में वह खुद भी समा गईं।
उधर, घर पर मोहित पत्नी और बच्चों के लौटने का इंतजार कर रहे थे। देर शाम तक तीनों के नहीं पहुंचने पर उनकी चिंता बढ़ गई। मायके में फोन कर जानकारी ली गई तो पता चला कि पूनम बच्चों के साथ दोपहर में ही ससुराल के लिए निकल चुकी थीं। इसके बाद परिजन और ग्रामीण रात तक आसपास उनकी तलाश करते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
बुधवार को भैंस चराने गए एक व्यक्ति की नजर नाले में पड़े तीन शवों पर पड़ी। सूचना मिलते ही परिवार और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। शवों की पहचान पूनम, विपिन और सुहानी के रूप में हुई। मां के साथ घर लौटने निकले दोनों मासूम उसी नाले में हमेशा के लिए खामोश हो गए।
चार बहनों के बीच इकलौता भाई था विपिन
आठ वर्षीय विपिन चार बहनों के बीच परिवार का इकलौता बेटा था। मां पूनम की आंखों का तारा होने के साथ वह छोटी बहन सुहानी का भी सहारा था। परिवार को उससे भविष्य की बड़ी उम्मीदें थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद माता-पिता उसके बेहतर भविष्य का सपना देख रहे थे। हादसे में मां और बहन के साथ विपिन की भी मौत हो गई। इकलौते भाई और मां को खोने के बाद चारों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
-
गरीबी ने पहले पढ़ाई छीनी, अब मां भी छीन ली
पूनम के पांच बच्चे थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ने उनके पढ़ाई के अवसर भी सीमित कर दिए। पति मोहित की पुणे की मजदूरी और पेंटिंग से होने वाली कमाई परिवार की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं थी। घर चलाने के लिए संघर्ष इतना बढ़ा कि बड़ी बेटियों को रिश्तेदारों के यहां रहना पड़ा।
परिवार के सामने बच्चों की पढ़ाई से पहले दो वक्त की रोटी और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती थी। अब हादसे ने इस परिवार से मां और दो छोटे बच्चों को भी छीन लिया है। पीछे रह गईं चार बेटियों के सामने मां की मौत का दुख ही नहीं, बल्कि आगे की जिंदगी का बड़ा सवाल भी खड़ा है।