महराजगंज। जिले के सभी उप निबंधक कार्यालयों में बैनामे में फर्जीवाड़ा रोकने की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब मोबाइल पर ओटीपी आने और पैनकार्ड वेरिफिकेशन के बाद ही बैनामे की प्रक्रिया शुरू होगी।
सोमवार से ही उप निबंधक कार्यालय सदर, नौतनवा निचलौल और फरेंदा में नई व्यवस्था से बैनामा किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, जिले के सभी उप निबंधक कार्यालयों में बैनामा प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी गई है।
अब किसी भी प्रकार के बैनामे के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को ओटीपी आधारित कर दिया गया है। इसके साथ ही पैनकार्ड सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे अब बगैर सही पहचान के बैनामा कराना असंभव हो गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बैनामे में होने वाले फर्जीवाड़े और हेराफेरी को पूरी तरह समाप्त करना है। अब तक बैनामा कराने के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन करना होता था। उसके बाद संबंधित पक्षकार कार्यालय में पहुंचकर बाकी की प्रक्रिया पूरी करते थे, लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया में मोबाइल नंबरों की गलत फीडिंग, फर्जी पहचानपत्र और कई अन्य तरीकों से फर्जीवाड़े की संभावना बनी रहती थी।
नई व्यवस्था में अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि बैनामे के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय पक्षकारों का सक्रिय मोबाइल नंबर फॉर्म में फीड किया जाए। उस नंबर पर एक ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) भेजा जाएगा। इसे सही ढंग से दर्ज करने के बाद ही ऑनलाइन फॉर्म खुलेगा। यह ओटीपी आधारित प्रणाली यह सुनिश्चित करेगी कि आवेदनकर्ता वास्तविक व्यक्ति ही हो और कोई अन्य उसकी पहचान का दुरुपयोग न कर सके।
पहले फर्जीवाड़े की थी गुंजाइश : अब तक जिले में बैनामे की प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन इसमें मोबाइल नंबर या पहचानपत्र की अनिवार्यता नहीं थी। इसके कारण दलाल और अन्य लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैनामा करा लेते थे। कई मामलों में पक्षकारों को जानकारी तक नहीं होती थी कि उनके नाम पर कोई जमीन बेची या खरीदी जा रही है। इन्हीं खामियों को दूर करने के लिए शासन स्तर से निर्देश जारी करते हुए 29 जुलाई से जिले में यह नई प्रणाली लागू कर दी गई।
कृषि भूमि के बैनामे के लिए यूनिक आईडी अनिवार्य : कृषि भूमि के संबंध में बैनामा कराना और भी सख्त हो गया है। अब ऐसे किसी भी बैनामे के लिए यूनिक आईडी को अनिवार्य कर दिया गया है। यूनिक आईडी, राजस्व विभाग की ओर से भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई एक विशेष पहचान संख्या होती है, जो हर खतौनी में दर्ज होती है। जिन काश्तकारों की खतौनी में यूनिक आईडी दर्ज नहीं है, उन्हें बैनामे के लिए पहले अपने अभिलेख अपडेट कराने होंगे। इस व्यवस्था के कारण बृहस्पतिवार को कई किसानों को परेशानी का सामना भी करना पड़ा क्योंकि उनके खतौनी रिकॉर्ड में यूनिक आईडी दर्ज नहीं थी। परिणामस्वरूप वे ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके।