जिले में वर्तमान में कुल 645 बीसी सखी कार्यरत, 239 पद रिक्त
योजना से महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और जरूरतमंद वर्ग को मिलेगा सीधा लाभ
महराजगंज। जिले के प्रत्येक गांव में अब बैंकिंग सेवाएं लोगों के घर की चौखट तक पहुंचेंगी। शासन स्तर से मिले निर्देश के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में बीसी सखी की रखी की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण जनता को गांव की चौखट पर ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना है। योजना से खासतौर पर महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और जरूरतमंद वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, जिले में वर्तमान में कुल 645 बीसी सखी कार्यरत हैं, जबकि 239 पद अभी रिक्त हैं। शासन से प्राप्त निर्देशों के बाद इन खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी ग्राम पंचायत बैंकिंग सुविधाओं से वंचित न रहे और सभी ग्रामीणों को समय पर वित्तीय सेवाएं मिल सकें। बीसी सखी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी प्रशिक्षित महिलाओं को बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट के रूप में नियुक्त किया जाता है। ये महिलाएं पहले से ही गांवों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और ग्रामीण परिवेश को भली-भांति समझती हैं। अब वे घर-घर जाकर आधार आधारित भुगतान, नकद जमा और निकासी, नया खाता खोलना, मिनी स्टेटमेंट उपलब्ध कराना, पेंशन व विभिन्न सरकारी योजनाओं की धनराशि निकालने जैसी महत्वपूर्ण बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
शासन के निर्देशों के बाद इस व्यवस्था को और व्यापक रूप दिया जाएगा। बैंकिंग सेवाओं का दायरा बढ़ने से ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए कस्बों या शहरों में स्थित बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि यात्रा पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
वर्जन
प्रत्येक गांव में बीसी सखी की उपलब्धता से वित्तीय समावेशन को मजबूती मिलेगी। अधिक से अधिक लोग औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ेंगे और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा। बीसी सखी के रूप में कार्य करते हुए महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि गांव में सम्मानजनक पहचान भी बना रही हैं।
-मोहम्मद जाकिर, उपायुक्त स्वत: रोजगार