फरेंदा। कस्बा गोरखपुर-सोनौली का प्रमुख बाजार होने के बावजूद भी बस स्टेशन का अभाव है। यात्रियों को मजबूरी में खुले आसमान के नीचे खड़ा होकर बस का इंतजार करना पड़ता है। यात्री बरसात के दिनों में भीगते हुए तो गर्मी में कड़ी धूप में वाहन का इंतजार करते है। कभी कभार बस के लिए घंटों खड़ा रहना पड़ता है, इस अवस्था में यात्री दुकानों के छाजन तले खड़ा होना पड़ता है।
गोरखपुर-सोनौली राजमार्ग पर स्थित कस्बा यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। यहां से नेपाल के साथ कई जिलों में जाने के लिए प्रमुख स्थान माना जाता है। जहां से पड़ोसी देश नेपाल, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, संत कबीरनगर सहित महराजगंज व निचलौल जाने का मुख्य मार्ग है।
आजादी के बाद से कस्बे में बस स्टेशन नहीं है। इसको लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी कोई खास रूचि नहीं दिखाई।
यहां से हजारों यात्री रोजाना यात्रा करने के लिए पहुंचते है। कस्बे में आधा दर्जन से अधिक राष्ट्रीयकृत बैंक भी है। जहां रोजाना कर्मचारियों व अधिकारियों का आवागमन लगा रहता है। वह भी दुकानों के छाजन के नीचे खड़ा होकर वाहन का इंतजार करते रहते हैं। कस्बे का आंबेडकर तिराहा व विष्णु मंदिर तिराहा महत्वपूर्ण माना जाता है। जहां यात्री हमेशा खड़े रहते हैं। सोनौली के रामकेश बहादुर सिंह ने बताया कि बस स्टेशन के अभाव में काफी समस्या हाेती है। मजबूरी में सड़क के किनारे खड़ा होकर बस का इंतजार करना पड़ता है। बुजुर्ग महिला कमलावती ने बताया कि सड़क के किनारे खड़ा होने के साथ कोई प्रसाधन भी नहीं है, जिसे लेकर दिक्कत होती है। कस्बे के रामनरायन चौरसिया ने बताया कि नगर में शुद्ध पेयजल का अभाव है, दूर-दराज के यात्रियों को पानी पीने के लिए समस्या होती है। बस स्टेशन होता तो सारी सुविधाएं मिलती, जिससे लोगों को सहूलियत मिलती।