महराजगंज/ निचलौल। भारत-नेपाल बार्डर पर दो ट्राली बरसीम बीज की बरामदगी ने धंधेबाजों की पोल खोल दी है। तस्कर मोटी रकम कमाने के लिए दिल्ली के सब्जी मंडी से बरसीम के बीज को लाकर कस्टम शुल्क चोरी करते हुए नेपाल भेजते हैं। यह सूडान निर्मित है। यह धंधा नया नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के चलते तस्कर अपने मकसद में असफल रहे। सुरक्षा एजेंसियों की टीम ने मुखबिर की सूचना पर 21 फरवरी की रात कोतवाली ठूठीबारी थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर में भारत-नेपाल बार्डर पर दो ट्रॉली बरसीम बीज को बरामद कर लिया है। यह बीज नेपाल भेजा जा रहा था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की टीम ट्रैक्टर ट्रॉली लदी बरसीम के बीज और चालक को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई में जुट हुई है।
निचलौल शहर स्थित बीज भंडार के एक विक्रेता ने बातचीत के दौरान बताया कि भारत नेपाल बार्डर पर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से बरामद किए गए सूडान कंपनी के बरसीन बीज दिल्ली के सब्जी मंडी से लाया जाता है। ये तीन क्वालिटी के होते हैं। इन तीनों क्वालिटी के बीज की खरीद कीमत 60 से 100 रुपये होती है। इनमें लाल रंग के बरसीम के बीज का सबसे कम कीमत 60 रुपये, सफेद रंग के बीज का 80 जबकि हाईब्रिड की कीमत 100 रुपये होती है। इन्हें 150 से 200 रुपये की कीमत में नेपाल में बेचा जाता है। वहीं धंधेबाजों से जुड़े एक शख्स के मुताबिक कस्टम शुल्क में चोरी कर बरसीम के बीच को नेपाल जाते ही ढाई गुना मुनाफा होता है। हालांकि बार्डर पर बरामदगी के बाद कस्टम के एक कर्मचारी ने नाम न उजागर होने की शर्त पर बातचीत में कहा कि बरसीम का बीज पर काफी मोटा कस्टम शुल्क लगता है। ऐसे में धंधेबाज शुल्क चोरी करने की नीयत से बार्डर के पगडंडियों से नेपाल भेज मोटी रकम कम रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि धंधेबाज भारत नेपाल बार्डर पर हर वक्त सक्रिय रहते हैं। वह दोनों देशों के बाजारों में बिकने वाले सामान की कीमत पर नजर रखे रहते हैं। फिर जैसे ही दोनों देशों के बीच किसी भी सामग्री के मूल्य में ज्यादा अंतर होता है। उसके बाद सिंडिकेट जोड़ अवैध रूप से सरहद पार करने में जुट जाते हैं।
निचलौल कस्टम अधीक्षक केएन सिंह ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर नौतनवा और ठूठीबारी कस्टम के अधिकारियों की ओर लक्ष्मीपुर बार्डर पर पहली बार बरसीम के बीज को बरामद किया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई चल रही है। तस्करी पर रोक लगाने के लिए निगरानी रखी जा रही है।
चारा और अनाज के लिए किया जाता है प्रयोग
ब्लॉक स्थित राजकीय बीज भंडार के कर्मचारी अनिल ने बातचीत में बताया कि सूडान घास को हिंदी में सोरघम और ड्रमंडी कहते हैं। यह एक संकर घास है। इसका इस्तेमाल चारा और अनाज के लिए किया जाता है। सूडान घास की खासियत है कि यह एक वार्षिक घास है। इसके तने 3 से 9 मिमी मोटे होते हैं, और 3 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचते हैं। इसके हल्के हरे पत्ते लंबे 4 से 15 सेमी चौड़े होते हैं। यह मिट्टी की एक बड़ी श्रृंखला के प्रति सहनशील हैं। यह थोड़ी क्षारीय और खारी मिट्टी को सहन कर सकता है। यह 7 से 27 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच वाले क्षेत्रों में अच्छी तरह से बढ़ता है।