अग्निशमन विभाग आधी अधूरी तैयारियों के साथ आग बुझाने के मिशन पर है। हालात यह हैं कि आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड उस समय पहुंच रही जब सब कुछ राख हो जाता है। संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के चलते विभाग अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो पा रहा है।
आग घटनाएं कोई नहीं नहीं है। हर साल मार्च से लेकर जून तक लोगों को इस आपदा का सामना करना पड़ता है। बावजूद विभाग को तैयारियों की याद तब आती है जब घटनाएं शुरू हो जाती हैं। अफसोस तो यह कि विभाग की ओर से पानी व रोड मैप भी नहीं तैयार किया गया। आग लगने पर कहां पानी की उपलब्धता रहेगी। वहां तक पहुंचने के लिए किस रास्ते जाना है इस महत्वपूर्ण बिंदु पर विभाग के पास मैप ही नहीं तैयार। आधा समय सड़क व पानी के लिए तालाब ढूढ़ने में ही बीत जाता है। यही कारण रहा कि पिछले शनिवार को चिउरहां में आग लगने के दौरान पानी खत्म होने पर लोगों का गुस्सा कर्मचारियों पर फूटा था। गाड़ी में तोड़फोड़ व कई कर्मचारियों की पिटाई भी हुई थी। यदि विभाग अपनी खामियों में सुधार लाए तो हानि कम हो सकती है।
अग्नि शमन विभाग की ओर से जन जागरूकता अभियान के नाम पर सिर्फ खानापूरी की जाती है। पूरे साल कुंभकर्णी नींद में रहने वाला विभाग दीवाली के समय जाग जाता है। इस साल भी विभाग की ओर से अभियान चलाया गया लेकिन स्कूलों में। जबकि सर्वाधिक आग लगने की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में होती हैं। गांव के लोगों को नहीं बताया गया कि आग लगने के बाद क्या करें।
आग बुझाने में संसाधनों व कर्मचारियों की कमी आड़े आती है। सदर व निचलौल में फायर स्टेशन हैं। सदर में कुल चार दमकल जबकि निचलौल के सिसवा में दो वाहन हैं। फरेंदा व नौतनवा में कई साल से विभाग की ओर से फायर स्टेशन बनाने के लिए जमीन तलाशी जा रही है। कर्मचारियों की संख्या भी कम ही है। एक एफएसओ के अलावा, छह लीडिंग फायरमैन, छह चालक व 45 फायर मैन हैं।