महराजगंज। उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण अधिनियम 2017 में संशोधन प्रभावी किया गया है। इसके तहत विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित की भूमिका अब सिर्फ मंत्रोच्चार के बीच वर-वधू को अग्नि के फेरे कराने तक नहीं रही।
अब उन्हें सरकारी दफ्तर में पहुंचकर यह शपथ भी देना होगा कि उन्होंने विवाह संपन्न कराया है। विवाह की रस्म उनके देखरेख में संपन्न हुई। यही शर्त निकाह पढ़ाने वाले काजी को पूरी करनी होगा।
विवाह पंजीकरण अब आसान नहीं रह गया। पहले प्रदेश के किसी भी जिले से विवाह पंजीकरण सुविधा ली जा सकती थी, लेकिन अब पंजीकरण सिर्फ वर या वधू पक्ष के निवास वाले जनपद से ही होगा। अगर नौकरी पेशा हैं तो उन्हें पंजीकृत किराया नामा प्रस्तुत करना होगा। साथ ही वर व वधू पक्ष से एक-एक गवाह ब्लड रिलेशन का होना चाहिए। इसमें माता- पिता, भाई-बहन और चाचा-ताऊ को शामिल किया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव की बात करें तो यह विवाह या निकाह संपन्न कराने वाले व्यक्ति की गवाही और शपथपत्र की अनिवार्यता की।
शादी व निकाह में शपथ लेने वाले पुरोहित अथवा मौलाना उपस्थित रहे, इसकी तस्दीक के लिए विवाह की वीडियो फुटेज और फोटोग्राफ भी पेन ड्राइव के माध्यम से आवेदनकर्ता को उपलब्ध करानी होगी। सभी शर्तों को पूरा करने के बाद ही उपनिबंधक विवाह प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर मोहर करेंगे। इसके बाद प्रमाणपत्र मान्य होगा।