कोहरा कम होने के बाद भी धुंध से कमजोर रही दृश्यता
बाहर निकलने वालों ने महसूस की ठंड की दुश्वारी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। मौसम में परिवर्तन के कारण कोहरे का ग्राफ दिन में घटा है। बावजूद इसके पछुआ की रफ्तार के आगे ठंड से किसी तरह की राहत मंगलवार को भी नहीं मिल सकी। बाहर निकले लोगों को मौसम की दुश्वारी झेलने के लिए मजबूर रहना पड़ा। कोहरे के ग्राफ में कमी आने के बाद भी दृश्यता प्रभावित रही जिससे सड़क पर चलने वाले वाहनों को लाइट जलाकर दृश्यता की व्यवस्था बनानी पड़ी। अलाव की आंच से लोग ठंड भगाने की जद्दोजहद में लगभग पूरे दिन जुटे दिखाई दिए। पछुआ के कारण सर्द मौसम के साथ अधिकतम तापमान भी लुढ़क कर 11 डिग्री पर आ गया है।
लगभग एक सप्ताह से तराई का मौसम ने लोगों की दुश्वारियों को बढ़ा दिया है। सोमवार को निकली धूप ने उम्मीद जगाई कि आने वाले दिनों में सर्दी से कुछ राहत मिलेगी। लेकिन मंगलवार के मौसम ने इसे धता बताते हुए आबोहवा की गलन को बरकरार रखा। ठंड का असर इतना रहा कि लोग घरों में रहकर भी रजाई-कंबल या अलाव के बिना नहीं रह सके। ग्रामीण क्षेत्रों में पराली, पुआल व घास फूस जलाकर लोग सर्दी भगाने का प्रयास करते रहे तो कस्बाई क्षेत्रों में अंगीठी में लकड़ी कोयला जलाकर लोग ठंड से मोर्चा लेते दिखे। बाहर निकलने वालों की दुश्वारी सर्वाधिक रही। खुद को ऊनी वस्त्र, शाल व स्वैटर के बाद भी लोग पछुआ की रफ्तार के आगे गलन भरी ठंड झेलने पर मजबूर रहे। बाइक सवार या ऑटो इत्यादि खुले वाहनों के जरिये यात्रा करने वाले थोड़ी दूरी तय करने के उपरांत आग सेंककर खुद को गर्म रखने के इंतजाम के लिए मजबूर होना पड़ा। कोहरे का ग्राफ पिछले दिनों के मुकाबले भले ही कम रहा लेकिन आठ किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चली हवा ने माहौल शीतलहर बनाने में कोई कमी नहीं आने दिया। धुंध के कारण दृश्यता का ग्राफ 30 मीटर रिकॉर्ड किया गया वहीं अधिकतम तापमान 19 तो न्यूनतम 11 डिग्री रिकार्ड किया गया। आंच के भरोसे दिन गुजारने वालों ने रात आठ बजे के बाद बिस्तर की तरफ जाने में ही भलाई समझी। बिस्तर में जाने के बाद भी 30 से 35 मिनट बाद ही शरीर गर्म हो सका
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कोट
तराई में कोहरे की चादर पूरी तरह से न समाप्त होने के कारण दृश्यता में कमी और शीत दिवस की स्थिति महसूस की गई। बुधवार को भी बदलाव की संभावना नही है। पछुआ के कारण गलन भरी सर्दी तराई में बनी रहेगी। अतुल कुमार सिंह, प्रभारी, आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र।