महराजगंज। जिले में मरीज माफिया की जड़ें गहरी हैं। सरकारी अस्पताल के बाहर एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। सब कुछ अपडेट होने के बाद मरीज को एंबुलेंस में लेकर निजी अस्पताल ले जाया जाता है। इसके बाद तीमारदारों की जेब ढीली होनी शुरू हो जाती है। केस बिगड़ने के बाद रेफर कर किनारा कस लिया जाता है। इस खेल में इतनी सफाई से काम होता है कि माफिया पकड़ में नहीं आता है। अगर कोई मरीज विरोध करता है तो समझा कर मामले को रफा-दफा करा दिया जाता है। यहां मरीजों के इलाज के नाम पर करोड़ों का खेल हो रहा है। शनिवार को सुबह 11 बजे जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर के बाहर एक दलाल खड़ा होकर तीमारदार से बातचीत कर रहा था। वह समझा रहा था की बाहर अस्पताल में बेहतर इलाज हो जाएगा। वहां सुविधा बेहतर होने का झांसा दे रहा था, लेकिन तीमारदार उससे बार बार यही बता रहा था कि यहां सस्ते में इलाज हो रहा है तो महंगे में इलाज क्यों कराएं। दलाल की उनकी बातों को काटते हुए कहा कि जितनी सुविधा मिलेगी, उसके हिसाब से रकम कम लगेगा। अभी समझा रहा था कि उसके पास किसी का फोन आया। उसके बाद वह बगैर कुछ बातचीत किए ही ट्रामा सेंटर से चला गया।
जिला अस्पताल के सामने एक निजी एंबुलेंस सर्विस लेन में खड़ी दिखी। सूत्रों की मानें तो मरीजों व तीमारदारों को झांसा देकर मरीज माफिया इसी एंबुलेंस से निजी अस्पताल में पहुंचा देते हैं। सामान्य बीमारी से लेकर आपरेशन तक केस अलग अलग कमीशन तय है। मरीज से जितनी मोटी रकम अस्पताल वसूल करता है, उसी हिसाब से मरीज माफिया को रकम मिलती। यही खेल महिला अस्पताल से भी होने की बात कही जा रही है। यहां भी प्रसव के लिए आने वाले महिलाओं के परिजनों को गुमराह कर मरीज माफिया अपने मनचाहे अस्पताल लेकर चले जाते हैं। मरीज माफिया की जाल में फंसने वाले ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले ज्यादातर मरीज होते हैं। इनके बहकावे में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज आ ही जाते हैं। झांसे में आकर निजी अस्पताल पहुंचे मरीज के तीमारदारों से इलाज के नाम पर जमकर उगाही की जाती है। इसमें इन दलालों का अच्छा खासा कमीशन शामिल रहता है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवा तक कैरियर के रूप में दलाल घूम रहे हैं। डॉक्टरों एवं चिकित्सकीय स्टॉफ के इर्द-गिर्द इन्हें अक्सर देखा जाता है। अस्पताल में नए मरीज के आते ही यह सक्रिय हो जाते हैं। पहले तीमारदारों के करीब पहुंचकर सेवा भाव का दिखावा करते हैं। उधर जिला अस्पताल व महिला अस्पताल सीसीटीवी कैमरे से लैस है। इससे निगरानी की जाती है। इसके बाद भी दलालों का हस्तक्षेप कम नहीं हो रहा है। दोपहर में महिला अस्पताल परिसर में एक महिला दिखी। उसकी गतिविधि से प्रतीत हो रहा था की वह तीमारदारों को बरगलाकर निजी अस्पतालों में ले जाती है। खास बात यह है कि सरकारी अस्पताल में बेहतर सुविधा नहीं होने का झांसा देकर गुमराह किया जाता है। इसे लोग समझ नहीं पाते हैं। जबकि सरकारी अस्पताल में दवा एवं बेहतर इलाज की सुविधा निशुल्क है।