106 नौनिहाल लड़ रहे टीबी से जंग
चाकलेट व फ्रूट फ्लेवर की मिल रही दवा
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। खेलने की उम्र में नौनिहाल टीबी की चपेट में आकर बीमार हो रहे हैं। तीन साल के दौरान जिले में टीबी से पीड़ित 0 से 18 वर्ष के 835 बच्चों ने दवा का सेवन किया है। चिकित्सकों के अनुसार रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। मौजूदा समय में जिला क्षय रोग विभाग टीबी से पीड़ित 106 बच्चों का इलाज कर रहा है। इनमें अधिकांश की उम्र आठ से 12 वर्ष तक है। इस बच्चों को फ्रूट व चाकलेट फ्लेवर की दवाएं खिलाई जा रही हैं।
जिले में कुल 1150 लोग टीबी से पीड़ित हैं। इनमें से 122 लोगों को टीबी की दवाई खिलाई जा रही है। इन मरीजों में 106 ऐसे हैं जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है। चिकित्सकों के अनुसार तीन साल पहले टीबी से पीड़ित मरीजों में बच्चों की संख्या कम रहती थी। अब इसमें पांच से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है। विभाग ने टीबी से पीड़ित वर्ष 2017 में 197 तथा 2018 में 387 बच्चों को चिह्नित किया था। वहीं 2019 में अब तक 106 बच्चों को विभाग की ओर से दवा दी जा रही है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सीमा राय ने बताया कि बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। कुपोषित बच्चे भी जल्द टीबी का शिकार हो जाते हैं। स्वस्थ बच्चे जब टीबी से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो वह बीमार हो सकते हैं। उधर, जिला अस्पताल के डॉ. एम भाष्कर ने बताया कि यदि बच्चे को दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक लगातार खांसी आती है तो जांच करना जरूरी होता है। टीबी के कीटाणु बच्चों के फेफड़ों से शरीर के अन्य अंगों में बहुत जल्द पहुंच जाते हैं। टीबी की शुरूआत में बच्चा अधिक बीमार रहता है। हल्का बुखार निरंतर बना रहता है। रात को सोते समय पसीना अधिक आता है। यह क्षय रोग के लक्षण होते हैं। इससे बच्चों को सांस लेने में भी परेशानी होती है।