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स्वास्थ्य

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बीस साल से सर्जन का इंतजार
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महराजगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अड्डा बाजार में शल्य चिकित्सा कक्ष (ओटी) है। इसमें शल्य क्रिया के लिए जरूरी उपकरण भी हैं, लेकिन 20 वर्षों से उनका इस्तेमाल नहीं किया गया है। अस्पताल शुरू होने से लेकर आज तक किसी सर्जन की तैनाती नहीं की गई। इस कारण कोई ऑपरेशन नहीं हुआ। गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। आपातकालीन सेवाएं बंद हैं। केवल ओपीडी संचालित किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अड्ड़ा बाजार का उद्घाटन 21 अप्रैल 2001 को किया गया था। तब से लेकर अब तक अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार के बारे में सोचा भी नहीं गया है। बरामदे में एंबुलेंस बेकार खड़ी है। अस्पताल भवन की दशा देखकर लगता है कि उसकी रंगाई-पुताई उद्घाटन के बाद से नहीं कराई गई है। अस्पताल में पर्याप्त कर्मियों की तैनाती नहीं है। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। बिजली जाने पर उजाले का वैकल्पिक इंतजाम नहीं है। आपातकालीन सेवाएं बंद हैं। आपात स्थिति में मरीजों को यहां से करीब 15 किमी दूर लक्ष्मीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लोगों को जाना पड़ता है। सिर्फ ओपीडी संचालित होती है। बुखार, पेट दर्द, गैस, उल्टी, शुगर, बीपी, खुजली आदि की दवाएं मिल जाती हैं।
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इन चिकित्सक और कर्मियों की है तैनाती
डॉ. शाश्वत गुप्ता, डॉ. अरुण कुमार गुप्ता, डॉ. विजय कुमार मौर्य, डेंटल हाईजिनिस्ट मनोज कुमार पांडेय, फार्मासिस्ट मनोज कुमार शर्मा, प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ जोखन मणि त्रिपाठी, एक्सरे प्रविधिज्ञ खूबलाल वर्मा, सफाई कर्मी धर्म प्रसाद।
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प्रतिदिन आते हैं करीब 60 मरीज
अस्पताल में तैनात डॉ. शाश्वत गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में इमरजेंसी सेवा नहीं है। प्रतिदिन 50 से 60 मरीज इलाज कराने आते हैं। गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर इलाज करने का प्रयास जारी है।
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अस्पताल में है इनकी जरूरत
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय, महिला चिकित्सक, फिजिसियन, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रमुख समस्याएं
शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। जरनेटर व इन्वर्टर की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल परिसर में दो इंडिया मार्का हैंडपंप है, जिनमें से एक खराब है, दूसरा दूषित जल देता है। परिसर में सफाई ठीक नहीं है। ऑपरेशन थिएटर के दरवाजे का शीशा टूट गया है। ऑपरेशन रूम में सफाई नहीं है। स्टेचर व एक अन्य उपकरण धूल से पटा है। अस्पताल के अंदर एक एंबुलेंस धूल फांक रही है। शौचालय खराब है। रात में कोई चिकित्सक व कर्मचारी नहीं रुकते हैं। चिकित्सकों व कर्मचारियों के लिए बना आवास जर्जर है। परिसर में बने ओवर हैड टैंक से पानी की आपूर्ति नहीं की जाती है।
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अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं होने से इलाज कराने में समस्या होती है। कहने को तो यह सीएचसी है, लेकिन सुविधा पीएचसी की तरह भी नहीं है। छोटी-मोटी बीमारियों का ही इलाज हो पाता है।
- मिथिलेश देवी, हनुमानगढ़िया
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कमर में दर्द होने पर इलाज कराने आई। बिजली गुल रहने के कारण एक्ससे नहीं हो सका। बाहर से कराना पड़ेगा। अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है।
- रमावती देवी, हनुमानगढ़िया
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अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। सामान्य बीमारी होने पर इलाज हो जाता है। शाम को अगर कोई बीमार हो जाय तो कोई डॉक्टर नहीं मिलता है।
- नूरजहां, भैसहिया
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल है। डॉक्टरों की कमी के कारण ठीक ढंग से इलाज नहीं हो पाता है। अच्छे एवं सस्ते इलाज की मंशा पर जिम्मेदार पानी फेर रहे हैं।
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- राजेश शर्मा, हनुमानगढ़िया
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चिकित्सकों की कमी के बारे में शासन को पत्र भेजा गया है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों में लोगों को बेहतर ढंग से स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
- डॉ. एके श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्साधिकारी
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