वित्तीय सत्र 2023-24 में रेशम कीट पालन के लिए जिले में 30 किसानों को कुल लागत का 60 फीसदी यानी 1.82 लाख रुपये का अनुदान दिया गया था। किसानों को बाकायदा प्रशिक्षण भी दिलाया गया। हैरत की बात यह कि इनमें से अधिकतर ने तीन साल बाद भी रेशम कीट पालन नहीं शुरू किया।
मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत दिए जाने अनुदान में बड़ी अनियमितता सामने आई है। वित्तीय सत्र 2023-24 में अधूरे मानकों और व्यवस्था पर सरकारी अनुदान ले लिया गया और तीन साल बाद भी काम नहीं शुरू हुआ।
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कहीं भवन बनाकर उसमें भूसा और कंडा रखा जा रहा है तो कहीं सिर्फ दीवार बनवाकर रेशम कीट पालन गृह का बोर्ड लगाकर छोड़ दिया गया है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत लाभार्थियों को रेशम कीट पालन गृह निर्माण और शहतूत की खेती के लिए अनुदान दिया जाता है।
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योजना का लाभ लेने वाले किसानों से पांच वर्ष तक रेशम कीट पालन का अनुबंध कराया जाता है। वित्तीय सत्र 2023-24 में रेशम कीट पालन के लिए जिले में 30 किसानों को कुल लागत का 60 फीसदी यानी 1.82 लाख रुपये का अनुदान दिया गया था।
किसानों को बाकायदा प्रशिक्षण भी दिलाया गया। हैरत की बात यह कि इनमें से अधिकतर ने तीन साल बाद भी रेशम कीट पालन नहीं शुरू किया। कहीं तय जगह पर धान की फसल उगाई जा रही है तो कहीं भवन को गोदाम के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
निचलौल क्षेत्र के सात लोगों को प्रशिक्षण के बाद अनुदान दिलवाया गया था। इनमें किसी ने भी अभी तक काम शुरू नहीं किया। कई लोगों ने चिह्नित मकान पर रेशम कीट पालन का बोर्ड लगा लिया है और उसमें भूसा रख रहे हैं। विभागीय अधिकारी इन मामलों पर हैरत जता रहे हैं।
उनका कहना है कि जहां भी योजना की रकम का दुरुपयोग पाया जाएगा, लाभार्थी को नोटिस जारी किया जाएगा और अनुदान की रकम की ब्याज सहित भू-राजस्व की तरह वसूली की जाएगी। अनुबंध का उल्लंघन करने वालों को भविष्य की सरकारी योजनाओं से वंचित किया जाएगा।
केस- एक
निचलौल के डोमा गांव में रेशम कीट पालन गृह बना हुआ है। बाहर बोर्ड भी लगाया गया है। तीन साल में बोर्ड की चमक धुंधली पड़ चुकी है। मकान भी खस्ताहाल है। उसका इस्तेमाल भूसा और कबाड़ रखने के लिए किया जा रहा है।
केस- दो
निचलौल क्षेत्र के ही बनकटवां गांव में अनुदान के पैसे से एक मकान बनवाया गया है। मकान के बाहर एक छोटा सा बोर्ड तो लगा है लेकिन उसे पर्दे से ढंका गया है। आसपास भी रेशम कीट पालन की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं पड़ती।
25 क्विंटल तक होता था कोकून का उत्पादन
वर्ष 1956 में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निचलौल में राजकीय रेशम फाॅर्म स्थापित किया गया था। करीब 5.69 एकड़ क्षेत्र में फैले इस फार्म से प्रतिमाह 20 से 25 क्विंटल तक कोकून (रेशम कीट) का उत्पादन होता था।
संसाधनों की कमी और कर्मचारियों के अभाव के चलते उत्पादन घटकर महज एक से डेढ़ क्विंटल प्रतिमाह रह गया है। वर्तमान में जिले के सात रेशम फार्म सीमित कर्मचारियों के भरोसे हैं।
ये है नियम - किसान के नाम पर न्यूनतम एक एकड़ तक सिंचित कृषि भूमि होनी चाहिए। - योजना के नियमों के अनुसार प्रति एकड़ करीब 5,000 पौधे लगाने होते हैं।
- एक वर्ष तक पौधों का रखरखाव करना होता है। - किसान के पास कीट पालन के लिए उपयुक्त स्थान होना चाहिए। भवन निर्माण के लिए 15x10 वर्ग फुट या 20x15 वर्ग फुट और स्वीकृत ब्लूप्रिंट का पालन करना आवश्यक है।
जिले में मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत सत्र 2023-24 में करीब 30 किसानों को लाभान्वित किया गया है। जल्द ही यह योजना शुरू करा दी जाएगी। जो योजना के नियमों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं उनसे अनुदान की रकम की वसूली कराई जाएगी: समर बहादुर सिंह, सहायक निदेशक, रेशम विकास विभाग