नेताओं की आपस की लड़ाई में आम जनता पिस रही है। बुधवार को जाम
में फंसे स्कूली बच्चों ने रोते हुए कहा कि अंकल जाम कब खत्म होगा। भूख लगी
है। लेकिन नेताओं को उनके भूख से क्या मतलब था। तीन घंटे तक जाम में
तड़पते रहे।
सांसद पंकज चौधरी के काफिले पर पथराव के बाद नगर का माहौल एकाएक बिगड़ गया।
गाड़ियों में तोड़फोड़ के बाद लोग अपने-अपने घरों के सामने और दुकान के
सामने आ गए।
लोग कुछ समझ पाते की लगभग चार बजे सपा के पूर्व सांसद अखिलेश
सिंह सक्सेना चौक पर धरने पर बैठ गए। धरने की वजह से दोनों तरफ से गाड़ियों
की लंबी लाइन लग गई। उसी समय कुछ स्कूलों की छुट्टियां भी हुई थीं। बस में
बैठे बच्चों ने रोते हुए कहा कि अंकल जाम कब समाप्त होगा।
भूख लगी है।
इसके अलावा जाम में फंसे किसी को ट्रेन पकड़ना था तो किसी को डॉक्टर को
दिखाना था लेकिन नेताओं को अपनी नेतागिरी से मतलब था। उन्हें जाम में फंसे
लोगों का ख्याल नहीं था। तीन घंटे बाद जाम समाप्त हुआ तो गाड़ियां जानी
शुरू हुईं।
सक्सेना चौक पर धरने के दौरान देवरिया के एएसपी अपनी गाड़ी लेकर पहुंच गए
तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें भी रोक लिया। जाने नहीं दिया। आधा घंटे बाद ही
वह निकल सके। देवरिया के एएसपी जिले में किसी काम से आए थे। लौटते वक्त
धरने के बीच वह अपनी गाड़ी लेकर जैसे ही निकलना चाहे। पूर्व सांसद अखिलेश
सिंह के कहने पर कार्यकर्ताओं ने गाड़ी रोक लिया। आधे घंटे बाद ही वह वहां
से निकल सके।
जाम में फंसे लोगों का ख्याल इंस्पेक्टर कोतवाली शशिभूषण मिश्र को नहीं
रहा। वह खुद को देखने में व्यस्त रहे। जिस समय जनता जाम से जूझ रही थी। उसी
समय इंस्पेक्टर कोतवाली शशिभूषण मिश्र अपने परिवार को फोन मिलाए। बेटों से
कहते सुने गए कि टीवी खोल लो मैं दिख रहा हूं।
सीओ सदर पंकज सिंह उस समय असहज स्थिति में आ गए । जब लोगों ने सांसद के
काफिले पर पथराव किया। बार-बार रट लगा रहे थे क्यूआरटी को जल्दी मौके पर
भेजो। वह ठंड में भी पसीना-पसीना हो रहे थे।