मानव रहित रेलवे फाटक पर रहें सतर्क
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महराजगंज। कुशीनगर जिले में बृहस्पतिवार को मानव रहित क्रासिंग पर सावधानी हटने से दुर्घटना हो गई। जिसे कभी भूला नहीं जा सकता है। इस हादसे में कई मासूम मौत की नींद सो गए। वहीं दूसरी ओर से महराजगंज जिले में मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर बेफिक्र होकर लोग आते - जाते दिखे। जिले में करीब दर्जन भर मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं। जहां से लोग ही नहीं, स्कूली वाहन भी गुजरते हैं। घटना के बाद से स्कूल संचालकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाना शुरू कर दिया है।
घुघली-शिकारपुर मार्ग पर स्थित कस्बे में एक मानव रहित रेलवे ढाला है। दूसरा ढाला जोगिया, तिवारी चौक से रामपुर रोड, घुघली इंदरपुर पुर मार्ग पर, मेदिनीपुर से जखीरा रोड पर मानव रहित क्रासिंग है। एक ढाला जो पकड़ियार विशुनपुर से प्यास ग्राम सभा रोड पर स्थित है। तमाम गांवों के आने जाने का सुगम रास्ता है। उस ढाले को रेलवे की तरफ से बंद कराने की कार्रवाई की जा रही है। बगहा व सिंहोरवा गांव के पास भी मानव रहित रेलवे क्रासिंग है। बनकटी के समीप, गनेशपुर, बरगदवा रामसहाय, मोलूहपुर, गिरधरपुर में भी मानव रहित फाटक है। नौतनवां क्षेत्र के बरवा बगहा, बरवा कला, राजधानी, खरगबरवा, महुआरी, मोगलहा में भी मानव रहित रेलवे क्रासिंग है। गनेशपुर रेलवे फाटक पर सितंबर 2015 में मारुति में इंटरसिटी टकरा गई थी। हादसे में दो लोग घायल हुए थे। बन्नी ढाला मानव रहित क्रासिंग पर 8 मई 2014 को रात करीब साढ़े बारह बजे मार्शल और ट्रेन की टक्कर में वाहन सवार 16 में से 15 की मौत हो गई थी। सभी लोग होरीलापुर से कुशीनगर के मइलानगरी बारात गये थे और रात में वापस आ रहे थे। पथ निरीक्षक कप्तानगंज निर्मल ने बताया कि कप्तानगंज से पनियहवां तक 26 मानव रहित क्रासिंग हैं। यहां गेट मित्र की तैनाती की गई है, जबकि 28 रेलवे क्रासिंग ऐसे हैं, जहां पर गेटमैन तैनात हैं।