बयान देने के लिए थाने पहुंचे पीड़ित और गवाहों को पुलिस ने लौटाया, बयान दर्ज करने के लिए 30 नवंबर को दी तारीख
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। घुघली थाना क्षेत्र के हरपुरमहंथ गांव में पराली जलाने के बहाने एक व्यक्ति के बीमार बेटे को जिंदा जलाने के मामले में घुघली पुलिस ने सात माह बाद किसी तरह आरोपी पर केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन पीड़ित और गवाहों का बयान दर्ज करने में हीलाहवाली कर रही है। बृहस्पतिवार को बयान दर्ज कराने थाने पहुंचे पीड़ित और गवाहों को पुलिस ने लौटा दिया। अब उनकी गवाही दर्ज करने के लिए पुलिस 30 नवंबर की तारीख दी है। ऐसे में पीड़ित निराश होकर गवाहों को साथ लेकर थाने से वापस घर आ गया।
दीवानी कचहरी के अधिवक्ता रविशंकर त्रिपाठी ने बताया घुघली थाना क्षेत्र के हरपुरमहंथ गांव निवासी अवधेश दुबे की ओर से न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दाखिल किया गया था। दाखिल वाद के मुताबिक पीड़ित अवधेश दुबे गांव के पश्चिम पोखरे किनारे झोपड़ी डालकर आवास बनवाएं हैं। उसी में पूरे परिवार के साथ रहते हैं। झोपड़ी के पश्चिम विरोधी हुतेश्वरानंद का खेत है। वह परिवार से रंजिश रखते हैं।
घटना बीते 20 अप्रैल 2023 शाम सात बजे की है। आरोपी हुतेश्वारानंद ने झोपड़ी को क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर खेत में पराली जलाने के लिए आग लगा दी। जबकि उस समय हवा की दिशा ऐसी रही कि झोपड़ी की तरफ ही आग का फैलाव होता गया। सोची समझी योजना के तहत पराली जला दी गई। परिणाम यह हुआ कि झोपड़ी भी जल गई। उस समय झोपड़ी में पांच गायें थीं। बीमार लड़का भी उसी में सोया था। लड़के ने किसी तरह से भागकर जान बचाई थी। नहीं तो उसकी मौत हो गई होती।
वहीं पीड़ित व्यक्ति की बेटी गोल्डी गाय को बचाने के चक्कर में बुरी तरह झुलस गई थी। पीड़ित अवधेश दुबे ने आरोप लगाते हुए कहा कि घटना की जानकारी घुघली पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस केस दर्ज करने के बजाए उन्हें आश्वासन देकर खामोश करा दिया। इतने गंभीर प्रकरण में केस दर्ज नहीं होने पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। घटना के सात माह बाद घुघली पुलिस न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर आरोपी के खिलाफ किसी तरह केस तो दर्ज कर लिया गया है, लेकिन अब उनका बयान दर्ज करने में हीलाहवाली हो रही है। पुलिस ने केस दर्ज होने के एक सप्ताह बाद भी पीड़ित और गवाहों का बयान नहीं दर्ज किया गया। उन्हें इसके लिए तारीख दी जा रही है।
घुघली थानाध्यक्ष नीरज राय से कोर्ट में मामला होने की बात कहते हुए कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
पांच दिनों तक थाने का लगाया चक्कर
पीड़ित अवधेश दुबे ने बताया कि वह घटना के चार दिनों तक न्याय के लिए सुबह शाम थाने का चक्कर काटते रहे, लेकिन उनकी पीड़ा नहीं सुनी गई। हालांकि घटना स्थल पर राजस्वकर्मियों के साथ मौके पर करीब डेढ़ घंटे मौजूद रहे थाना प्रभारी ने उनसे पांचवें दिन कहा कि अब तुम्हारे मामले में कार्रवाई करने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। पांच दिनों तक दौड़ने के बाद इतनी बात सुन वह निराश होकर थाने से लौट आया। फिर मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी कई बार शिकायत की। लेकिन वहां भी उन्हें निराश ही होना पड़ा, फिर न्यायालय की शरण ली।