अंग्रेजों के शासन काल में बना श्रीनगर का पुल कभी क्षेत्र का विकास का मार्ग प्रशस्त करता था। लेकिन वही पुल आज अपनी दशा पर आंसू बहा रहा है। पुल का तीन पाया धंसा कि क्षेत्र का मार्ग भी अवरूद्ध हो गया। सिंचाई विभाग के लोगों ने पुल से होकर बड़े वाहनों का रास्ता बंद कर दिया। जिससे क्षेत्र का विकास पूरी तरह ठप पड़ गया। लोगों को बाढ की आशंका का भय सता रहा है।
फरेंदा तहसील के श्रीनगर ताल पर 1936 में ब्रिटिश शासन काल में अंग्रेजों ने क्षेत्र में व्यापार की दृष्टि से पुल का निर्माण कराया था। पर्यटन की दृष्टि से भी श्रीनगर ताल का अलग महत्व रहता था। जो आज उपेक्षित है। ताल पर बने पुल की लंबाई 40 मीटर पर 20 फाटक लगा हुआ था।
निर्माण के समय पुल की चौड़ाई मात्र पांच मीटर रही जो बाद में पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी व पूर्व मंत्री श्यामनरायन तिवारी ने सिंचाई विभाग से 10 लाख की लागत से पुल का चौड़ी करण कराया। श्रीनगर ताल से क्षेत्र के नगेसरापुर,अखडौरा,चौतरवां,मध्यनगर,महुआरी,सेघरिया,राजधानी,मदरहना सहित कई गांवो के किसानों के फसलों की सिंचाई होता था।
लेकिन तीन वर्ष पूर्व पुल का दो पाया धंस गया। सिंचाई विभाग ने पाया के निर्माण करने के बजाय रास्ता को अवरूद्ध कर दिया।
पुल के दोनों तरफ बैरिकेटिंग भी कर दिया। जिससे दो पहिया चार पहिया सभी का आवागमन बंद कर दिया। इससे लोगों को परेशानी हो रही है।
बीस किलोमीटर बढा फासला
पुल टूटने से आवागमन बाधित होने के साथ लोगो को छ: किलोमीटर की जगह 20 किलोमीटर की दूरी अधिक तय करनी पड़ रही है पुरंदरपुर,लक्ष्मीपुर,रानीपुर,फरेंदा,बहदुरी,कोल्हुई,चौतरवां,सुल्तापुर,ईटहिया,फौजदारजोत,शिवसहायपुर,सहित अनेक जगहो पर जाने में समस्याएं आ रही है।
सिंचाई के लिए पांच माइनर बने थे
श्रीनगर ताल से सिचाई के लिए ताल के अगल-बगल पांच माइनर जैसे चौतरवां,मदरहा,मध्यनगर,मैनहवां व लेहड़ा माइनर लगाया गया था। जो पुल के टूटने से ताल का पानी भी सूख जा रहा है जिससे किसानों के सामने सिंचाई का संकट उत्पन्न हो गया।
विदेशी पक्षियों की आमद घटी
तालाब में पानी संरक्षित रहने पर नवम्बर व दिसम्बर माह में श्रीनगर ताल में विदेशी पक्षियों में पटेरा, साइवेरियन, टिकिया ,लालसर, कसार, घोघिला ,सारस, कामनहील्स, नीलगिरी , पनकौवा,सहित अनेक पक्षियो की आमद होती थी। लेकिन ताल के सूख जाने पर पक्षियो का भी मोह भंग हो गया। इससे लोगाें में रोष व्याप्त है प्रशासन से लेकर शासन तक सभी से इस मुद्दे से बात की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।