वित्तीय वर्ष 2022-23 में जल निगम ने ग्राम पंचायतों में खराब हैंडपंपों के रिबोर का दिया था प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। हैंडपंप रिबोर के नाम पर लाखों का खेल हुआ है। कागज में सारे हैंडपंप दुरुस्त हैं, लेकिन पड़ताल में इनकी कलई खुल गई। निचलौल ब्लॉक के मिश्रवलिया गांव में 16 इंडिया मार्का हैंडपंप के रिबोर पर 5,04,971 रुपये खर्च कर दिए गए। कागज में सभी हैंडपंप ठीक हो गए, लेकिन हकीकत में एक भी हैंडपंप ठीक नहीं है। रकम भी खर्च हो गया और समस्या भी बनी हुई है।
शनिवार को पड़ताल के दौरा मिश्रवलिया में चौकाने वाला तथ्य सामने आया है। कोरम पूरा करने के लिए हैंडपंप की हल्की-फुल्की मरम्मत करा दी गई है। इस मामले में ग्रामीणों ने अधिकारियों से शिकायत कर जांच कि मांग की है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जल निगम ने ग्राम पंचायतों में खराब पड़े हैंडपंपों के रिबोर का प्रस्ताव दिया था। इसी के तहत मिश्रवलिया गांव में 16 हैंडपंपों को रिबोर के योग्य माना गया। उसके बाद विभाग के जिम्मेदारों ने रिबोर कराकर जल निगम को रिपोर्ट भी भेज दी।
एक रिबोर पर मजदूरी और सामाग्री के नाम पर 29 से 37,000 हजार रुपये खर्च हुए है। जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से अधिकतर हैंडपंपों का रिबोर नहीं किया गया है। मात्र मरम्मत कराकर 5,04,971 रुपये का खेल कर दिया गया है। विभाग के अधिकारी तत्काल मामले की जांच कर कार्रवाई की बात करने लगे।
निचलौल ब्लॉक के एडीओ पंचायत विनय पांडेय ने बताया कि गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर रखना शासन की प्राथमिकता है। सभी सचिव एवं ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायत में पेयजल व्यवस्था सही रखने के लिए हैंडपंप का नियमानुसार रिबोर एवं मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं। उक्त मामले की जानकारी नहीं थी। अब जानकारी मिली है। जल्द जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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केस नंबर एक
मिश्रवलिया गांव के अनुसूचित बस्ती में भरत के दरवाजे पर लगे हैंडपंप को चलाते हुए ग्रामीण रामप्रीत ने बताया कि जिम्मेदारों ने पेयजल मुहैया कराने के लिए विगत महीने हैंडपंप का रिबोर कराया गया था। रिबोर के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब दरवाजे पर ही पेयजल की व्यवस्था हो जाएगी, लेकिन जिम्मेदारो ने रिबोर का कोरम पूरा करते हुए 29,438 रुपये हजम कर गए। हैंडपंप गंदा पानी उगल रहा है।
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केस नंबर दो
गांव के सुरेंद्र ने हैंडपंप को चलाते हुए कहा कि दरवाजे पर खराब पड़े हैंडपंप को करीब तीन माह पहले 30,088 रुपये की लागत से रिबोर कराया गया था। रिबोर के महज कुछ ही दिनों बाद हैंडपंप ने पानी देना बंद कर दिया। ऐसे में हैंडपंप की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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केस नंबर तीन
गांव के हरिओम के दरवाजे पर लगे हैंडपंप को चलाते हुए ग्रामीण कमलेश भारती ने कहा कि 35611 रुपये की लागत से हैंडपंप का रिबोर कराया गया है। जिम्मेदारों ने हैंडपंप रिबोर में ऐसा खेल किया कि रिबोर के कुछ दिन बाद ही हैंडपंप ने पानी देना बंद कर दिया।
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केस नंबर चार
गांव में बहादुर के दरवाजे पर लगे हैंडपंप को चलाते हुए युवक मनीष ने कहा कि हैंडपंप रिबोर के नाम पर 30088 रुपये खर्च किए गए हैं। रिबोर के कुछ दिन बाद ही लीकेज की समस्या हो गई है। अब हैंडपंप से दूषित जल निकल रहा है।
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दूषित पानी पीने से यह होती है बीमारी
सदर सीएचसी अधीक्षक डॉ. केपी सिंह ने कहा कि दूषित पानी के सेवन से डाइरिया, टाइफाइट, पीलिया, दस्त समेत पेट से संबंधित तमाम रोग हो जाते हैं। यदि समय रहते इनका उपचार नहीं किया गया तो धीरे-धीरे यह रोग गंभीर हो जाते हैं।
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कोट
अगर ऐसी बात है तो मामले की जांच कराई जाएगी। कार्य में लापरवाही किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पेयजल के लिए गांव-गांव हैंडपंप लगे हैं।
-संतोष कुमार राय, मुख्य विकास अधिकारी