हत्या के दौरान पहने कपडों को फेंक दिए
बाल अपचारी के अनुसार रास्ते में बृजमनगंज बाजार में दो टी-शर्ट व एक शर्ट एक कपड़े की दुकान से खरीदकर पहन लिए तथा हत्या में प्रयुक्त पहने कपड़ों को रास्ते में निकालकर फेंक दिया गया। सभी लोग जब नौगढ़ कचहरी से दो बजे के बाद चले तो अपना अपना मोबाइल बंद कर दिया तथा राधेश्याम के पिता का मोबाइल फोन लेकर संतोष ने फ्लाइट मोड में कर दिया था, जिससे की लोकेशन आउट न होने पाए। रात 9 बजे के बाद नौगढ़ पहुंचकर राधेश्याम ने मुझे 500 रुपये में रिजर्व टेंपो करके दिया, जिससे मैं घर चला गया तथा घर से नेपाल भागने की फिराक में था कि मुझे पुलिस टीम द्वारा पकड़ लिया गया।
जमीन में टावर लगवना चाहता था राधेश्याम
राधेश्याम चौधरी अपने पिता चंद्रभान (मृतक) से अपने हिस्से की जमीन अपने नाम लिखने के लिए कहे, क्योंकि राधेश्याम जमीन में टावर लगवाना चाहते थे। राधेश्याम के पिता चंद्रभान (मृतक) तैयार नहीं थे, इसलिए उनको मार डाला गया। घटना के दिन टावर वाले से मिलवाने का बहाना बनाकर कचहरी नौगढ़ से चंद्रभान (मृतक) को लाकर गाड़ी में बैठाकर लाने के बाद जंगल में घटना को अंजाम दिया गया।