महराजगंज। घुघली कस्बे के हॉस्पिटल रोड जोगिया मोड पर सुनील प्लेसमेंट रिसोर्स अस्थाई कार्यालय खोलकर बेरोजगारों को एक साल से चूना लगाया जा रहा था। एजेंट ने सभी युवाओं से दो-दो लाख लेकर किनारा कस लिया।
खेत रेहन रखकर तो कोई ब्याज पर रकम लेकर दिया, लेकिन सभी के सपने पल भर में बिखर गए। अब तो आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है। भविष्य संवारने के लिए विदेश गए थे, लेकिन कर्जदार बनकर घर लौटे। घुघली कस्बे से थोड़ी दूरी पर परसौनी बुजुर्ग गांव में कई युवा ठगी के शिकार हो गए हैं। इसमें संजय मिश्रा भी शामिल हैं। संजय पूरी कहानी बताते हुए भाउक हो गए। उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी दूर करने के लिए प्रयास किया तो कर्जदार बन गया।
अब तो रकम भी हाथ से चली गई। हाईस्कूल तक पढ़ाई करने वाले संजय मिश्रा की चार बेटियां हैं। उन्होंने बताया कि 22 मई को चेक के जरिए एजेंट को रकम दिया था। बेरोजगार होने के कारण विदेश जाने को सोचा तो एजेंट से धोखा मिला। डेढ़ एकड़ खेती है। पूरी रकम दो लाख रुपये खेत रेहन रखकर दिया था। उन्होंने बताया कि पूरी तैयारी करने के बाद मुंबई 16 जून को पहुंचा था। वहीं करीब 30 लोग विदेश जाने के लिए पहुंचे। किसी को पता नहीं था की वीजा, पासपोर्ट फर्जी है। सभी लोग इस बात से अनभिज्ञ थे। एजेंट से आखिरी बात मुंबई रेलवे स्टेशन पर फोन के जरिए हुई थी।
उसने बताया था की सात जून को मेडिकल कराने के साथ ही जरूरी औपचारिकता पूरी होगी। सभी लोगों को 21 जून को भेज दिया जाएगा। होटल के लिए बात किया तो फोन बंद कर दिया। कई बार प्रयास करने के बाद भी उससे बात नहीं हुई। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशन पर रात गुजारने के बाद सुबह एअरपोर्ट पहुंचा तो वहां पता चला की पासपोर्ट व वीजा फर्जी है। यह सुनकर सन्न हर गया।
कुछ समझ में नहीं आ रहा था। किसी तरह घर पहुंचा और उसकी तलाश की जाने लगी, लेकिन वह नहीं मिला। अब तो कर्जदार बनकर जीवन गुजर बसर करना पड़ रहा है। इसी गांव के विवेक मिश्रा भी ठगी के शिकार हुए हैं। उन्होंने बताया कि इंटर तक पढ़ाई की गई। बेरोजगार हूं। इस वजह से सोचा विदेश जाकर कुछ काम करूंगा, लेकिन अब तो ब्याज पर ली गई रकम चुकाने में परेशानी होगी। रिश्तेदार व अन्य लोगों से ब्याज पर दो लाख रुपये लिया हूं। खेती 50 डिस्मिल खेत है। अब तो चिन्ता सता रही है की कर्ज किस तरह से चुकता होगा।
परसौनी बुजुर्ग गांव के भागीरथी जायसवाल ने बताया कि एक लाख रुपये रखा था। एक लाख रुपये कर्ज लेकर एजेंट को दिया। गांव से अन्य लोग भी एक ही साथ मुंबई के लिए रवाना हुए थे। सभी लोग धोखाधड़ी होने की बात से अनजान थे। हर कोई सपना संजोए हुए था की उसकी तंगहाल जिंदगी बेहतर होने वाली है। शुरुआत में एजेंट ने पूरा भरोसा दिया था कि कोई धोखाधड़ी नहीं होगी।
अगर कोई बात हुई तो रकम वापस मिल जाएगा। घुघली कस्बे में ऐसा कार्यालय बनाया था की पहली बार जाने वाला हर कोई हैरान हो जाता। उन्होंने कहा कि एजेंट के कार्यालय में बैठे युवक बातचीत करने में निपुण थे।
उनकी बातचीत से ऐसा लगता था की यह बेहतर एजेंट है। रकम देने के बाद से ही धीरे-धीरे व्यवहार में बदलाव होने लगा था।