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Maharajganj News: बारिश के बाद बढ़े सर्पदंश के मामले, सतर्कता ही बचाव का उपाय

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बारिश के कारण बिल में पानी भरने से बाहर निकल रहे हैं सांप
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पर्यावरण विशेषज्ञों ने विशेष सतर्कता बरतने की दी सलाह
महराजगंज। बारिश का मौसम शुरू होते ही सांप काटने की घटनाएं बढ़ गई हैं। रोजाना चार से पांच मामले सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बारिश के कारण बिल में पानी भरने से सांप बाहर निकल रहे हैं। इसकी वजह से सर्पदंश के मामले बढ़े हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के सदस्य अरशद हुसैन ने बताया कि बारिश की वजह से बिल में पानी भर जाता है। सांप आराम करने के लिए अपने बिल से बाहर निकल आते हैं। इसकी वजह से सांप काटने के मामले बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि बारिश बढ़ने के बाद यह मामले और तेजी से बढ़ेंगे। इससे बचने के लिए घरों को साफ-सुभरा रखें। घर में चूहों का बसेरा न होने दें। घर में कूड़ा-कबाड़ न रखें। इसमें सांपों के छुपना आसान होता है।
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जूते पहनते समय काफी सावधानी बरतें। अच्छे से जूते को देख लें। कपड़े भी झाड़ करके ही पहने। धान के खेत में जा रहे हैं तो काफी सतर्क रहें। खेतों से निकलने वाले खर-पतवार को मेड़ों पर एकत्र न करें। उसे नष्ट कर दें। खर-पतवार को हाथ न लगाएं। उसे डंडे के सहारे हटाएं। रात के समय अंधरे में न निकलें। जाते समय टॉर्च लेकर जाएं। अगर सांप दिखे तो उसे मारे नहीं वन विभाग को सूचित करें।
रात के समय शिकार की तलाश में सांपों की सक्रियता और भी ज्यादा रहती है। इसके चलते सांप काटने के मामले सामने आ रहे हैं। यह मामले निचलौल क्षेत्र में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। सांप काटने के बढ़ते मामलों के कारण सरकारी अस्पतालों पर एंटी वेनम (सांप के काटने के बाद लगने वाला इंजेक्शन) की मांग बढ़ गई है।
झाड़-फूंक न करें, घरेलू नुस्खे न अपनाएं
सीएमएस एके द्विवेदी ने बताया कि सांप काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों (जैसे घाव को काटना या कसकर बांधना) में कीमती समय बर्बाद न करें। इसके बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी बड़े स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। समय से इलाज होने पर मरीज की जान बच सकती है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी वेनम वैक्सीन मौजूद है।
जिला अस्पताल में रोजाना पहुंचे रहे पांच से छह मरीज
जिला अस्पताल में दो महीने पहले प्रतिदिन दो से तीन मामले पहुंच रहे थे। लेकिन बारिश होने के बाद से रोजाना पांच से छह मामले पहुंचे रहे हैं। वहीं निचलौल में सांप काटने के मामले ज्यादा आ रहे हैं। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के सदस्य अरशद हुसैन ने बताया कि निचलौल में सबसे ज्यादा कोबरा और करैत दिखते हैं। यह काफी जहरीले सांप हैं, इनसे बचके रहना चाहिए।
सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है एंटी वेनम

जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में 200 वायल और स्टोर में 100 वायल एंटी वेनम उपलब्ध है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरेंदा में एंटीवेनम का 55 इंजेक्शन है। वहां पर एक माह में करीब पांच सर्पदंश के मामले आए हैं। नौतनवा कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 55-55 एंटीवेनम इंजेक्शन उपलब्ध है। सीएचसी में विगत एक माह में अब तक मात्र दो लोगों को इंजेक्शन लगाया गया है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धानी में एंटी वेनम 55 इंजेक्शन मौजूद है। पिछले माह जून में सीएचसी पर दो सर्पदंश के केस आए थे। परसामलिक में 65 एंटीवेनम है। 14 पेशेंट आए थे दो को लगा है। वहीं माह जून से आठ जुलाई तक सीएचसी निचलौल में सर्प दंश के 10 मरीजों ने इलाज करवाया है। निचलौल सीचीएसी में एंटी वेनम के 250 वायल उपलब्ध हैं।
सर्पदंश से महिला गंभीर, रेफर

महाराजगंज। निचलौल क्षेत्र के ग्राम पंचायत पिपरपाती में एक महिला खेत में काम करने के दौरान सर्प दंश की शिकार हो गई। परिजन ने निजी वाहन से महिला को सीएचसी निचलौल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। ग्रामसभा पिपरपाती निवासी सुनीता (35) पत्नी गोबिंद बुधवार को खेत की निराई-गुड़ाई करने गई थी। खेत में जहरीले सांप ने उसे काट लिया। परिजन निजी वाहन से उसे सीएचसी निचलौल पहुंचाया। डॉक्टरों ने 15 एंटी वेनम इंजेक्शन लगाने के बाद से जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। संवाद
केस एक

कोल्हुई थाना क्षेत्र के मुडली निवासी अकाली देवी (50) 18 जून को खेत में काम करने गई थीं। इसी दौरान उन्हें सांप ने काट लिया। परिजन आनन-फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने जांच-पड़ताल के बाद मृत घोषित कर दिया।
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केस दो
निचलौल थाना क्षेत्र में दो माह पहले सर्पदंश से धमऊर-मटरा गांव की निवासी ज्ञानमती (52) पत्नी रमेश शनिवार को घास काटने सिवान गई थीं। उन्हें जहरीले सांप ने काट लिया। परिजनों द्वारा झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने से इलाज में देरी हुई, जिसके कारण महिला को बचाया नहीं जा सका।
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