महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा से सटे हरदीडाली बड़का टोला में बने सेफ्टी टैंक में अधिक संख्या में मिले सांप तस्करी के कनेक्शन को मजबूत कर रहे हैं। बाॅर्डर से करीब 200 मीटर की दूरी पर यह टैंक बना है।
नए सेफ्टी टैंक में अचानक इतनी बड़ी संख्या में सांप आ गए, इसे लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है। नेपाल के रास्ते चीन में सांप तस्कर पहुंचाते हैं। ठूठीबारी बाॅर्डर में बीते माह सांप बरामद हुए थे। तस्कर इसे नेपाल नहीं ले जा सके थे। हरदीडाली बडटोला गांव भारत नेपाल के करीब है। चौराहा जहां घर बना है, उससे नो मेंस लैंड के करीब 200 मीटर की दूरी पर होगा। टैंक में सांप मिलने को लेकर गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग इसे तस्करी से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ लोग प्राकृतिक रूप से सांपों का टैंक में होना बता रहे हैं।
नए टैंक में इतनी अधिक संख्या में सांपों का होना कई तरह के सवाल खड़ा कर रहा है। दो माह पहले ठूठीबारी बाॅर्डर पर दो मुहा सांप बरामद हुआ था। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि तस्कर नेपाल में सांपों को पहुंचाकर मोटी रकम बना रहे हैं।
चर्चाओं पर गौर करें तो तस्कर टैंक को सुरक्षित जगह जानकर सांपों को रख दिए होंगे, लेकिन मकान मालिक ने समय से पहले टैंक में पानी भरने की सोची तो कलई खुल गई। अगर कुछ दिन और रूके होते तो शायद सांप सरहद पार हो गए होते हैं। सांपों की बरामदगी को लेकर उठे सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है।
सभी इसे हल्के में लेकर मामले को रफा दफा कर दिए। लोगों का कहना है कि आश्चर्य की बात है की 15 दिन में सांप बड़े कैसे हो गए। यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है। अनुमान है कि तस्कर सेफ्टी टैंक को सुरक्षित जानकर सांपों को यहीं रख दिए थे। कलई खुलने के बाद जिम्मेदारों ने पर्दा डालकर मामले को किनारे कर दिया। हरदीडाली बड़का टोला के रहने वाले गृहस्वामी वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि पैतृक घर हरदीडाली बड़का टोला में है। चौराहे पर पत्नी के नाम से जमीन खरीदकर मकान बनवाया हूं। मकान बनकर इसी वर्ष तैयार हुआ है, जिसका अभी गृह प्रवेश नहीं हुआ है। लगभग 15 दिन पहले शौचालय की टंकी साफ कराकर मुंबई चला गया।
तीन दिन जाने में और तीन दिन आने में समय लगा। इसके बाद सोचा की शौचालय की टंकी में पानी भरा जाए। पानी पाइप से नहीं जा रहा था तो सोचा क्या हो सकता है। टंकी का ढक्कन खोलकर देखा तो पाइप जाम था और टंकी में सांपों के बच्चे थे। सोचा की कहीं देवी-देवताओं का प्रकोप न हो। तीन दिन सोखा बगैरह को दिखाया तो पता चला की सांप तीन दिन बाद गायब हो जाएंगे। जब सांप गायब नहीं हुए तो फिर इधर-उधर लोगों को जानकारी दी। शौचालय की टंकी में लगभग 500 से अधिक पनिहा, डेहुआ, कुछ गोहुअन के भी बच्चे थे। हमें लगता है कि पाइप के रास्ते सांप आ गए होंगे।
ऊंची कीमत पर नेपाल में बेचते हैं शिकारी : सूत्रों की माने तो सांप को जिंदा पकड़ने वाले शिकारी इसे ऊंची कीमत पर नेपाल में बेचते हैं, जहां से चीन के तस्कर इंडोनेशिया ले जाते हैं। इसकी खाल से नशे और मिर्गी की दवाएं बनाई जाती हैं। शिकारी कम से कम ढाई सौ ग्राम के दोमुंहे सांप को पकड़कर नेपाल पहुंचाते हैं।
वहां से चीनी तस्कर उसे इंडोनेशिया ले जाते, जहां विशेषज्ञों की देखरेख में सांप को मारा जाता है। उसकी खाल चीन के मार्केट में पहुंचाई जाती है। चीन के मार्केट में 250 ग्राम के बोआ की कीमत दो लाख है, जबकि 500 ग्राम के सात लाख। एक किलोग्राम की कीमत 10 लाख से अधिक है। चीन, ताइवान, मलेशिया में बोआ का इस्तेमाल दवा बनाने के लिए किया जाता है। इससे नशा, ताकत एवं मिर्गी के लिए दवा बनाई जाती है।
डॉ. अनिल कुमार बताते हैं कि दो मुंहा सांप पकड़ना आसान है, क्योंकि ये जहरीले नहीं होते हैं। ये मोटे आकार के होते हैं। इस वजह से इसकी चाल सुस्त होती है। सर्दी से बचने के लिए ये चूहे के बिल में छुप जाते है। गर्मी में निकलते ही शिकारी पकड़ लेते हैं। सुनहरे रंग व सुस्त रफ्तार वाले बोआ की पूंछ भी मुंह की तरह दिखने की वजह से इसे दोमुंहा सांप कहा जाता है। बोआ की औसत उम्र 15-20 वर्ष होती है।