सीमावर्ती इलाकों में बने अस्थायी गोदामों में डंप कर मटर की नेपाल हो रही तस्करी
पहले नेपाल से भारत में होती थी मटर की तस्करी, अब भारत से नेपाल
महराजगंज। नेपाल सीमा पर तस्करी के आए दिन नए-नए तौर-तरीके सामने आते हैं। अब एक नया तरीका सामने आया है। धंधेबाज बाकायदा जीएसटी बिल पर मटर** खरीद कर भारतीय क्षेत्र में डंप कर रहे हैं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर बचाकर पगडंडियों के रास्ते उसे सीमा पार भेज दे रहे हैं, जहां दाम दोगुना मिलने से तस्करों को भारी मुनाफा हो रहा है। इससे पहले कनाडियन मटर** की तस्करी नेपाल से भारत में होती थी लेकिन अब नेपाल के बाजारों में मटर** की कीमतों में आई तेजी के बाद तस्करों ने रुख बदल लिया है। वर्तमान में भारत से नेपाल की ओर मटर** की अवैध सप्लाई जोरों पर है। हाल ही में नेपाल के भैरहवा क्षेत्र में भारतीय मटर** से लदा एक ट्रक पकड़े जाने के बाद इस तस्करी के खेल का खुलासा हुआ।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिन पहले एक सुरक्षा कर्मी और तस्कर के बीच हुई बातचीत का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद यह आशंका गहराई है कि सीमा पर चल रहे इस अवैध कारोबार में तस्करों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वाले कुछ जिम्मेदार लोग और सीमावर्ती क्षेत्र के प्रभावशाली लोग भी शामिल हो सकते हैं। यही कारण है कि लगातार कार्रवाई के बावजूद तस्करी पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है।
40 रुपये में खरीद, 85 रुपये में बिक्री
तस्कर जीएसटी के वैध बिल पर 40 से 45 रुपये प्रति किलो की दर से मटर खरीदते हैं। इसके बाद उसे सोनौली बॉर्डर से लेकर बरगदवा, परसामलिक, ठूठीबारी और लक्ष्मीपुर खुर्द जैसे सीमावर्ती इलाकों में डंप किया जाता है। मौका मिलते ही साइकिल, बाइक और पिकअप वाहनों से मटर नेपाल भेज दी जाती है, जहां इसकी कीमत 80 से 85 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। सूत्रों के असुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करों ने कई घरों के अंदर अस्थायी गोदाम बना रखे हैं। यहां पिकअप और ऑटो से मटर लाकर स्टोर की जाती है, फिर छोटे वाहनों के जरिए सरहद पार कराई जाती है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर छापेमारी कर मटर बरामद भी करती हैं, जिससे कुछ दिनों तक तस्करी पर अंकुश लगता है लेकिन इसके बाद यह धंधा फिर सक्रिय हो जाता है।
खुली सीमा का फायदा उठा रहे तस्कर
कस्टम विभाग के एक अधिकारी के अनुसार भारत–नेपाल सीमा पर आयात-निर्यात के लिए निर्धारित लैंड कस्टम्स स्टेशन (एलसीएस) बनाए गए हैं। इन निर्धारित बिंदुओं से ही वैध रूप से माल का आयात-निर्यात किया जा सकता है और इसके लिए आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य होते हैं। हालांकि भारत–नेपाल सीमा काफी लंबी है और लोगों की आवाजाही भी अधिक रहती है। कस्टम विभाग की तैनाती सीमित स्थानों पर ही होती है, जबकि पूरे बॉर्डर की निगरानी सशस्त्र सीमा बल करता है। इसी भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौती का फायदा उठाकर तस्कर अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।
तस्करी की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। कस्टम की टीम लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर रही है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
डीके अस्थाना, कस्टम अधीक्षक, निचलौल