नो मेंस लैंड शून्य से 10 किमी सफर टोल तक अधूरा है कार्य
दिसंबर 2023 में शुरू हुआ था सड़क का निर्माण कार्य, जून 2026 करना है पूरा
सोनौली। भारत-नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर सोनौली से शून्य से लेकर बन रही गोरखपुर तक सड़क अधूरी है। कार्यदायी संस्था की सुस्त रफ्तार स्थानीय सहित विदेशी पर्यटकों की मुसीबतें बढ़ा रही है। काम के नाम पर जगह-जगह डायवर्जन और उससे होने वाली परेशानी से लोग आजिज आ चुके हैं। साथ ही सुरक्षा मानकों के अभाव में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
कार्यदायी संस्था सिर्फ 10 किलोमीटर सड़क बनाने में तीन वर्षों से लगी है। सड़क का निर्माण कार्य दिसंबर 2023 में शुरू हुआ था और इसे जून 2026 में पूरा किया जाना है। जिम्मेदारों का दावा है कि समय पर निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। लेकिन सड़क पर गड्ढे और निर्माण कार्य की गति को देखते हुए ऐसा नहीं लग रहा कि समय पर सड़क का निर्माण किया जा सकेगा। 10 किलोमीटर की सड़क निर्माण के दौरान ही सैकड़ों गड्ढे बनाकर छोड़ दिए गए हैं। इस रास्ते से लोग किसी तरह सफर कर रहे हैं। खुले गड्ढों और सुरक्षा मानकों की अपर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से राहगीरों को दुर्घटना की आशंका सताती है।
सोनौली के एसएसबी रोड से लेकर गोरखपुर की तरफ जाने वाली पूरी सड़क खराब है। कहीं पार्किंग कहीं टू लेन का कार्य अभी अधूरा है तो कहीं नाली नहीं बन सकी है। कुछ दूरी पर लेपन है तो आधी सड़क पर मिट्टी गिराकर छोड़ दिया गया है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय द्वार सोनौली बॉर्डर इन दिनों विकास की कछुआ रफ्तार और प्रशासनिक अनदेखी जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। एसएसबी रोड से कुलसेरवा बाईपास तक कहीं-कहीं सड़क अधूरी पड़ी है। इसके चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नाली का निर्माण भी अधूरा पड़ा हुआ है। डिवाइडर बनाकर छोड़ दिया गया है।
अधर में चार वार्डों की लाइफलाइन
सोनौली कोतवाली से लेकर एसएसबी रोड तक नेपाल की तरफ जाने वाली फोरलेन सड़क का निर्माण पिछले 36 महीनों से अधूरा पड़ा है। इस खंड में सड़क के दोनों ओर चार वार्डों की घनी आबादी है। सड़क कहीं ऊंची है तो कहीं बेहद नीची, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को अपने घरों से मुख्य मार्ग तक आने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। गुलशन निवासी राहुल नगर ने बताया कि बीते कई सालों से निर्माण कार्य जारी है। आने-जाने में बहुत परेशानी होती है। सड़क कब बनेगा पता नहीं चल पा रहा है।
हादसों के कारण सफर करने में डर
सड़क के ऊबड़-खाबड़ और असंतुलित होने के कारण यह हिस्सा अब ''''एक्सीडेंट जोन'''' में तब्दील हो चुका है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री ऊपर-नीचे सड़क के कारण अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं। रात के अंधेरे में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। इस अव्यवस्था से स्थानीय लोगों में विभाग के प्रति आक्रोश है। लोगों का कहना है कि धूल और जाम से तो परेशान थे ही, अब ऊबड़-खाबड़ सड़क ने चलना भी मुहाल कर दिया है।
ट्रक चालकों की बढ़ी मुसीबत
नेपाल को भारत से निर्यात करने वाले सामानों से लदे सैकड़ों ट्रक रोजाना इस मार्ग से गुजरते हैं। सड़क अधूरी होने के कारण ट्रकों के फंसने और पलटने का खतरा हमेशा बना रहता है। इससे न केवल परिवहन में देरी हो रही है बल्कि चालकों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय महत्व का मार्ग होने के बावजूद सड़क विभाग इस मार्ग पर निष्क्रिय है। निर्माण कार्य जिस धीमी गति से चल रहा है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि इसे पूरा करने की कोई समय सीमा तय नहीं है। जिसके कारण कार्यदायी संस्था इस सड़क पर ध्यान नहीं दे रही है।
कोट
चार साल से यह सड़क बन रही है। अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। घर से निकलते ही दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कहीं नाली सड़क से ऊपर है तो कहीं बनी ही नहीं है।
-संतोष पांडेय, वार्ड नंबर 6 गांधी नगर
सफर करने में डर लगता है। चार साल का वक्त कम नहीं होता। विभाग की धीमी गति लोगों पर भारी पड़ रही है। धूल और जाम से तो परेशान थे ही, अब ऊबड़-खाबड़ सड़क ने चलना भी मुहाल कर दिया है।
प्रेम जायसवाल, निवासी सोनौली
वर्जन
जहां दिक्कतें हैं उसे जल्द दूर करा दिया जाएगा। निर्माण कार्य भी जल्द पूरा करा लिया जाएगा।
ललित प्रताप पाल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई