बागापार। परासखांड़ के रामजानकी मंदिर पर चल रहे रामलीला मंचन के चौथे दिन कलाकारों ने माता सीता के जन्म का मंचन किया। दिखाया गया कि एक बार राजा जनक के राज्य मिथिला में अकाल पड़ गया। तब महाराज जनक ने ऋषियों, मुनियों और विद्वानों से सलाह मांगी की अकाल कैसे समाप्त किया जाए। सभी ने सलाह दी कि यदि आप स्वयं हल से भूमि को जोतेंगे, तब भगवान इंद्र की कृपा से मिथिला का अकाल दूर हो सकता है। राजा जनक ने राज्य से अकाल को समाप्त करने के लिए और अपनी प्रजा के हित के लिए निर्णय लिया और स्वयं हल चलाने को तैयार हुए।
राजा जनक ने भूमि को जोतना शुरू किया। राजा जनक जब भूमि पर हल चला रहे थे तभी हल जाकर एक जगह अटक गया। राजा जनक ने देखा कि हल की नोंक एक स्वर्ण कलश से अटकी हुई थी। उन्होंने स्वर्ण कलश को निकाला, उस कलश में दिव्य ज्योति लिए एक नवजात कन्या थी। कन्या को राजा जनक ने अपनी पुत्री मान लिया। इस दौरान रामाज्ञा गौतम, परमवीर वर्मा, संदीप जायसवाल, पंकज कन्नौजिया, अमेरिका, फूलबदन, अनिल वर्मा, रामनरेश, राजाराम, राजेश वर्मा, महेश वर्मा उपस्थित रहे। संवाद