सीमावर्ती क्षेत्रों से सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जानकारी जुटाई जा रही है, कि कौन सा व्यवसाय कब शुरू हुआ। इतना ही नहीं इससे पहले वहां क्या होता था। व्यवसाय करने वाले का इतिहास क्या है।
महराजगंज जिले के भारत नेपाल बॉर्डर से सटे बाजार इन दिनों सुरक्षा एजेंसी के रडार पर हैं। जिले के करीब 85 किलोमीटर खुली लंबी सीमा नेपाल राष्ट्र से लगती है। ऐसे में इन क्षेत्रों के सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की कुंडली सुरक्षा एजेंसियों के साथ ही स्थानीय पुलिस की ओर से खंगाली जा रही है। सूत्रों के मुताबिक कभी-कभी आपराधिक गतिविधियां और आतंकी साजिशें भी इस बॉर्डर के रास्ते होकर ही आती है। ऐसे में यह कार्रवाई को बेहद जरूरी है।
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जानकारी के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय से पत्र आने के बाद खुफिया एजेंसी के साथ ही स्थानीय थाने की पुलिस टीम भी इस कार्य में जुटी हुई है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों से सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जानकारी जुटाई जा रही है, कि कौन सा व्यवसाय कब शुरू हुआ। इतना ही नहीं इससे पहले वहां क्या होता था। व्यवसाय करने वाले का इतिहास क्या है। अगर पहले से किसी का कोई बड़ा व्यावसायिक इतिहास नहीं था। फिर भी वह हाल के कुछ वर्षों में बड़ी दुकानें, शोरूम, वाहन और संपत्ति खड़ी कर ली है। तो ऐसे धनी लोगों पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर बनी हुई हैं। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से उनकी पूंजी के स्रोत का पता लगाया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की ओर से हर जानकारी डिजिटल डेटाबेस में संरक्षित भी की जाएगी। क्योंकि आवश्यकता पड़ने पर खुफिया विभाग, एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड) और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) जैसी एजेंसी इसका प्रयोग कर सकेंगी। इतना ही नहीं इसकी पूरी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भी भेजी जाएगी।