घुघली थाने में दर्ज हुआ नामजद समेत 14 पर प्राथमिकी
12 दिसंबर 2025 के बीच कई खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर
सात व्यक्तियों और लोन देने वाले छह बैंकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
महराजगंज। घुघली थाना क्षेत्र के हरखी गांव निवासी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने अपने रिश्तेदार महिला समेत कई लोगों पर उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर छह बैंकों से करीब 1.37 करोड़ रुपये का फर्जी पर्सनल लोन कराने का आरोप लगाया है। घुघली पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दिए तहरीर में डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि नवंबर 2025 में उनकी रिश्तेदार गरिमा सिंह ने फोन कर पूछा था कि उनका कोई लोन चल रहा है या नहीं। उन्होंने कार लोन चलने की जानकारी दी। आरोप है कि गरिमा ने खुद को फाइनेंस कंपनी से जुड़ा बताते हुए कार लोन बंद कराने के लिए नया पर्सनल लोन कराने की बात कहीं। इसके लिए उनके पिता ध्रुव नारायण सिंह ने भी गारंटी दी।
इसके बाद गरिमा के कहने पर पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक स्टेटमेंट समेत अन्य दस्तावेज विशाल यादव नामक व्यक्ति को व्हाट्सएप के माध्यम से भेज दिए। आरोप है कि इन दस्तावेजों का दुरुपयोग कर एक लोन के बजाय छह अलग-अलग बैंकों से उनके नाम पर पर्सनल लोन स्वीकृत करा दिए गए। शिकायत के अनुसार चोलामंडलम से 19.41 लाख, बंधन बैंक से 23.64 लाख, यस बैंक से 24.51 लाख, आईसीआईसीआई बैंक से 19.89 लाख, एक्सिस बैंक से 27.02 लाख और एचडीएफसी बैंक से 22.92 लाख रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया गया। यह कुल राशि करीब 1.37 करोड़ रुपये है।
डॉ. दिलीप सिंह का आरोप है कि गरिमा सिंह ने रकम वापस करते हुए छह माह के भीतर सभी लोन बंद कराने का आश्वासन दिया। कुछ समय तक ईएमआई भी जमा की गई लेकिन अप्रैल 2026 के बाद भुगतान बंद कर दिया गया।
इस बाबत घुघली थानाध्यक्ष सूरज कुमार ने बताया कि पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह की तहरीर पर आरोपी गरिमा सिंह, ध्रुव नारायण सिंह निवासी ग्राम महादेव झारखंडी पंप नहर गोरखपुर, विशाल यादव निवासी रुलोनस डिस्ट्रिब्यूशन प्राइवेट लिमिटेड गोरखपुर, साधना मल्ल, मोहन सिंह, दिनकर मणि त्रिपाठी, भानु प्रताप सिंह और गोरखपुर स्थित बंधन बैंक, चोला मंडल बैंक, यस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक के अधिकारी और कर्मचारी नाम पता अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
परमात्मा की आत्महत्या के बाद खुला मामला
इसी गिरोह के शिकार नौतनवा के रतनपुर में तैनात रहे डाॅ. परमात्मा सिंह ने करीब 1.40 करोड़ रुपये की ठगी के बाद एम्स थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बैंक की रिकवरी और कर्ज के दबाव से परेशान होकर उन्होंने 13 अगस्त को गोरखनाथ क्षेत्र के बसंत एन्क्लेव की आठवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद गरिमा और उसके पिता गिरफ्तार हुए। गरिमा सिंह व अन्य पर इस प्राथमिकी के अलावा गोरखनाथ, सहजनवां और तिवारीपुर में सात मामले दर्ज हैं। घुघली की प्राथमिकी आठवीं है।
स्टेशन अधीक्षक मोहन सिंह ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी
मोहद्दीपुर निवासी स्टेशन अधीक्षक मोहन सिंह की तहरीर पर 11 अगस्त 2026 को एम्स थाने में ध्रुव नारायण सिंह, बेटी गरिमा सिंह, दामाद भानू प्रताप सिंह, विशाल यादव, चंद्र प्रकाश, राजेंद्र कुमार और दिनकर मणि त्रिपाठी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। मोहन सिंह ने आरोप लगाया कि ध्रुव नारायण सिंह उनके रिश्तेदार हैं। उन्होंने बताया था कि उनकी बेटी गरिमा लोगों के लोन माफ करा देती है। इस पर उन्होंने अपने पुराने लोन के संबंध में गरिमा से संपर्क किया। आरोप है कि गरिमा ने अलग-अलग बैंकों से उनके नाम पर 93.20 लाख रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया।
छह माह के भीतर सभी लोन बंद कराने का दिया था आश्वासन
डॉ. दिलीप कुमार का आरोप है कि उन्हें इसकी जानकारी होने पर गरिमा सिंह ने रकम वापस कर छह माह के भीतर सभी लोन बंद कराने का आश्वासन दिया। कुछ समय तक ईएमआई भी जमा की गई लेकिन अप्रैल 2026 के बाद भुगतान बंद कर दिया गया। इसके बाद बार-बार कहने के बावजूद टाल-मटोल की जाती रही।
छह ब्लैंक चेक पर कराया था हस्ताक्षर
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बंधन बैंक के एक कर्मचारी ने लोन प्रक्रिया के दौरान छह ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर कराकर ले लिए थे। बाद में इन चेक के माध्यम से रकम गरिमा सिंह के पिता ध्रुव नारायण सिंह, साधना मल्ल, दिनकर मणि त्रिपाठी समेत अन्य लोगों के खातों में भेजे जाने की जानकारी मिली।
दो से 12 दिसंबर 2025 तक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर
शिकायतकर्ता के मुताबिक उसके एसबीआई खाते से दो दिसंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच कई खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर हुई। इसमें ध्रुव नारायण सिंह के खाते में 20 लाख, साधना मल्ल के खाते में पांच लाख, मोहन सिंह के खाते में छह लाख, दिनकर मणि त्रिपाठी के खाते में करीब 5.99 लाख और अन्य खातों में लाखों रुपये भेजे जाने का उल्लेख है। कुल ट्रांसफर राशि करीब 1.37 करोड़ रुपये बताई गई है।
लोन के लिए किसी बैंक में नहीं किया था आवेदन
डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने किसी बैंक की शाखा में जाकर लोन के लिए आवेदन नहीं किया और न ही किसी लोन आवेदन पर हस्ताक्षर किए। उन्हें आशंका है कि लोन प्रक्रिया के दौरान उनके मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियों में भी बदलाव किया गया। उन्होंने संबंधित खातों को फ्रीज कराने और रकम की वसूली की मांग की है।