फरेंदा। कस्बे के बाईपास पर स्थित सील किया गया एक स्पा सेंटर अवैध तरीके से दोबारा संचालित किया जा रहा था। मंगलवार को एसडीएम और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की तो इसका खुलासा हुआ। मौके से तीन युवतियां और एक युवक को हिरासत में ले लिया गया। एसडीएम के अनुसार, गिरफ्तार युवतियों में दो नेपाल की बताई जा रही हैं, जिनके पास फर्जी आधार कार्ड भी मिले हैं। वहीं पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है उसमें विरोधाभास नजर आ रहा है।
एसडीएम शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि बाईपास स्थित ‘कंफर्ट स्पा सेंटर’ को करीब एक माह पहले बिना पंजीकरण संचालित करने और अवैध गतिविधियों के कारण सील किया गया था। इसी बीच मंगलवार को सूचना मिली कि यह स्पा सेंटर चोरी से फिर संचालित किया जा रहा है और उसमें अवैध गतिविधियां चल रही हैं। इस पर पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने दोपहर करीब तीन बचे छापा मारा। मौके पर तीन युवतियां और एक युवक मिले। उन्हें हिरासत में ले लिया गया। छापे के दौरान सेंटर के पास कोई वैध लाइसेंस, पंजीकरण या आवश्यक अभिलेख नहीं मिले। पूछताछ में यह भी स्पष्ट हुआ कि फर्जी आधार कार्ड तैयार कर दो युवतियों को नेपाल से लाया गया था।
सील के बाद भी आधा शटर उठाकर चलता रहा धंधा
जनवरी में गोरखपुर में स्पा सेंटर में किशोरी से दुष्कर्म की घटना के बाद जिले में भी होटल और स्पा सेंटरों पर अभियान चलाया गया था। उसी क्रम में फरेंदा बाइपास पर स्थित यह सेंटर भी सील हुआ था। इसके बावजूद संचालक ने दुस्साहस दिखाते हुए आधा शटर उठाकर सेंटर का दोबारा संचालन शुरू कर दिया।
कस्बे में यह चर्चा जोरों पर है कि इतनी बड़ी गतिविधि चलती रही और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी। आरोप है कि पड़ोसी देश की युवतियों को अवैध तरीके से लाकर यहां अनैतिक कार्य कराए जा रहे थे। फिलहाल पकड़ी गई युवतियों और युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। स्पा सेंटर को फिर से सील कर दिया गया है।
फर्जी आधार और पहचान पर उलझन
फरेंदा। बाईपास स्थित स्पा सेंटर पर हुई छापेमारी के बाद अब प्रशासनिक बयानों में सामने आए विरोधाभास ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
एसडीएम ने जहां पूछताछ के आधार पर दो युवतियों के नेपाल की होने और उनके पास फर्जी आधार कार्ड मिलने की बात कही है, वहीं पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट में फर्जी आधार का कोई उल्लेख नहीं है और युवतियों की पहचान अलग-अलग राज्यों से बताई गई है।
किस पर भरोसा करें : मामले में दो बिंदुओं पर पुलिस और प्रशासन में विरोधाभास दिख रहा है। एक युवतियों की पहचान और क्या मौके से फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए या नहीं? यदि एसडीएम स्तर पर फर्जी दस्तावेज मिलने की पुष्टि की गई है, तो पुलिस रिपोर्ट में उसका जिक्र क्यों नहीं है? और यदि पुलिस के अनुसार दस्तावेज सही हैं, तो एसडीएम के दावे का आधार क्या है?
एसडीएम का दावा: दो युवतियां नेपाल की, आधार फर्जी
एसडीएम शैलेंद्र कुमार गौतम ने कहा कि पूछताछ में पता चला कि पकड़ी गई दो युवतियां नेपाल की निवासी हैं। उन्होंने अपने आधार कार्ड की कॉपी दी, प्राथमिक जांच में फर्जी मिला। इसके विपरीत पुलिस की रिपोर्ट में तीनों युवतियों की पहचान अलग-अलग बताई गई है। एक युवती नेपाल की, एक गोरखपुर के सहजनवा की और एक गुजरात की। पुलिस रिपोर्ट में फर्जी आधार कार्ड मिलने या उसकी बरामदगी का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या दस्तावेजों की जांच अलग-अलग स्तर पर अलग निष्कर्ष दे रही है, या फिर तथ्य सामने आने में चूक हुई है।