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अब नहीं चलने पाएगी स्कूलों की मनमानी

Sun, 09 Apr 2017 12:07 AM IST
महराजगंज/ अमर उजाला ब्यूरो
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जांच करती टीम। - फोटो : अमर उजाला
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 प्राइवेट स्कूलों की मनमानी अब नहीं चलने पाएगी। स्कूल से टाई, बेल्ट, कापी, किताब आदि की बिक्री कर मोटा रकम अर्जित करना महंगा पड़ सकता है। क्योंकि अब स्कूलों से होने वाली बिक्री पर टैक्स देना होगा। वाणिज्य कर विभाग की ओर से छापेमारी में प्राइवेट स्कूलों की ओर से किताब, कापी समेत अन्य सामान बिक्री में टैक्स जमा करने की पोल खुली है। अब 6 स्कूलों को नोटिस भेजकर टैक्स जमा करने का निर्देश दिया गया है।
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शनिवार को नगर में वाणिज्य कर विभाग की टीम ने स्कूलों में छापेेमारी की। साथ ही जिस स्कूल का सामान जिस दुकान से मिलता है। वहां भी छापेमारी हुई। वाणिज्य कर विभाग की इस कार्यवाही से नगर हड़कंप मच गया। सेंट जोसेफ स्कूल, सेंट जेवियर्स स्कूल, लिटिल फ्लावर, पं. दीनदयाल, पैरामाउंट स्कूल पर टीम पहुंची। यहां किताब कापी समेत अन्य सामग्री की बिक्री के बारे में जानकारी ली गई। इसके बाद पूछा गया कि कहां से पुस्तक और काफी सहित अन्य सामग्री ली जाती है। स्कूल प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी पर संबधित पुस्तक की दुकानों को चेक किया गया। वहां संबधित स्कूल का पर्चा भी मिला। इसके अलावां जहां स्कूल में ही काफी, किताब, ड्रेस, टाई, बेल्ट आदि का बिक्री होना पाया गया। उनके टैक्स भरने की जांच की गई तो कलई खुल गई। छापेमारी टीम ने ऐसे छह स्कूलों को नोटिस दिया है कि वे टैक्स जमा करे। अन्यथा कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
दुकानों को चेकिंग के दौरान तमाम गड़बड़ी मिली। जांच में पाया गया कि स्कूल सामग्री का बिक्री कर दुकानदार भी टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे दुकानदारों को भी नोटिस दिया गया है कि अगर टैक्स जमा करने में हिलाहवाली हुई तो उनका व्यापार में पंजियन निरस्त कर दिया जाएगा। छापेमारी टीम में सहायक आयुक्त हरिश्चंद्र मौर्या, मनमोहन वर्मा, कृष्ण कुमार शामिल रहे।
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हरिश्चंद्र मौर्या ने बताया कि छापेमारी कर पांच स्कूलों एवं दुकानदारों को नोटिस दिया गया है। जांच में इनकी ओर से टैक्स न जमा करना पाया गया। जिले में अभियान चलाकर चेकिंग की जाएगी। साथ ही टैक्स जमा न करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
बढ़े हुए शुल्क के बोझ तले दबे अभिभावक
महराजगंज। जिले में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से अभिभावक सांसत में हैं। बच्चों की पढ़ाई का खर्च बढ़ जाना उनके मुश्किल हो गया है। नगर के तमाम चर्चित स्कूलों के शुल्क में पिछले वर्ष के मुकाबले 15 प्रतिशत शुल्क में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। इस वजह से बढ़े हुए शुल्क के बोझ तले अभिभावक दबे है।
स्कूलों मे शुल्क की बढ़ोत्तरी ही नहीं कापी किताब सहित अन्य सामग्री भी दी जाती है। इसके एवज में मोटी रकम स्कूल प्रशासन की ओर से ली जाती है। यहीं नही प्राइवेट प्रकाशन की पुस्तकें भी महंगे दाम पर मिलती है। वहीं एनसीईआरटी की पुस्तकों की कीमत काफी कम है।
अभिभावक संध्या नायक कहना है कि बीते वर्ष बेटे का शुल्क करीब 6 हजार जमा हुआ था। इस कक्षा 7 नामांकन हुआ है तो शुल्क बढ़कर 8 हजार रुपये हो गए। महंगाई के इस दौर में शुल्क बढ़ोत्तरी जायज नहीं है। स्कूल प्रबंधन को इस पर विचार करना चाहिए।
राजीव नगर के रहने वाले संजीव कश्यप भी स्कूलों की ओर से बढ़ाए गए शुल्क को लेकर नाराजगी जाहिर किए। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष के मुकाबले इस साल शिक्षण समेत शुल्क में 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। शहर के नामी स्कूल में दोनो बेटियां पढ़ती है। वाणिज्य कर विभाग की कार्रवाई को बेहतर बोलते हुए उम्मीद जाहिर किए कि अब स्कूलों की मनमानी पर अंकुश जरूर लगेगा।
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