तेंदुअहिया गांव में 55 एकड़ जमीन के पट्टे के आवंटन के मामले में 2009 का आदेश निरस्त
एसडीएम ने 14 अगस्त को दिया निर्णय, तीन सितंबर को होगी अगली सुनवाई
एसडीएम न्यायालय के आदेश से लौटी पट्टाधारकों की उम्मीद
महराजगंज। तेंदुअहिया ग्राम पंचायत के 55 एकड़ जमीन के पट्टा मामले में भूमिहीनों को आंशिक जीत मिली है। स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले सदर एसडीएम न्यायालय ने 27 मई 2009 का वह फैसला निरस्त कर दिया जिसके आधार पर पट्टा धारकों की जमीनें छिन गई थीं। यह सूचना मिलने के बाद से ही ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, 27 मई 2009 के आदेश के जरिये ही तेंदुअहिया के 55 एकड़ जमीन पर एक व्यक्ति पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर काबिज हो गया था। लेकिन अब एसडीएम न्यायालय के फैसले व उक्त आदेश निरस्त होने की स्थिति में पट्टा धारकों की कायमी अपील को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। साथ ही माननीय हाइकोर्ट व राजस्व परिषद के निर्देशों का हवाला देते हुए पक्षकार को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई के लिए तीन सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
जिला पंचायत सदस्य सुरेश चंद्र साहनी के मुताबिक पूर्व में भूमिहीनों को आवंटित 55 एकड़ जमीन की मालकिन गोरखपुर की प्रेम किशोरी थीं। उनके नाम से छावनी की जमीन अभिलेखों में दर्ज थी। 1984 में उनकी मौत के बाद जमीन का कोई वारिस सामने नहीं आया। इस वजह से 1995 तक जमीन परती ही पड़ी रही।
1995 में तहसीलदार की रिपोर्ट पर वारिस रहित यह जमीन जिला भूमि प्रबंधन समिति के अधीन आई तो तत्कालीन एसडीएम ने 55 एकड़ जमीन को तेंदुअहिया के 37 भूमिहीनों को पट्टे पर देते हुए खेती का अधिकार दे दिया। 1995 से 2009 तक यह जमीन उनके कब्जे में रही लेकिन 27 मई 2009 को दिए गए फैसले के आधार पर किसानों से पट्टे की जमीन छिन गई और पावर ऑफ अटॉर्नी प्रपत्र लगाने वाला पूरी मिल्कियत पर काबिज हो गया।
भूमिहीनों न जीती आधी लड़ाई
मामले के अधिवक्ता अमीन अंसारी ने बताया कि कोर्ट के निर्देश पर 2007 में ही यह मुकदमा सदर एसडीएम न्यायालय में प्रेम किशोरी बनाम सरकार पंजीकृत हुआ। इसी मुकदमे का हवाला देकर 2009 में तेंदुअहिया की पट्टे पर दी जमीन बिना नोटिस वापस ले ली गई। 19 वर्ष बाद इस मुकदमे में कोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई पूरी करने के बाद 2009 में दिया गया तत्कालीन एसडीएम का आदेश निरस्त कर पट्टा धारकों की कायमी स्वीकार की। अब यह उम्मीद बढ़ी है कि फैसला पट्टा धारकों के हित में ही आएगा।
57 दिन धरने पर बैठे रहे भूमिहीन
कोर्ट में चल रहे इस मामले की प्रक्रिया लंबी होती देख भाकियू ने पीड़ित भूमिहीनों के साथ तेंदुअहिया में धरना प्रदर्शन शुरू किया। लगातार 57 दिन धरना देने के दौरान भूमिहीनों ने कई बार अपनी मांगों से प्रशासन को अवगत कराया। प्रशासन की मान-मनौव्वल के बाद धरने को 30 दिन तक स्थगित कराया। इसी बीच अब एसडीएम न्यायालय के फैसला आया है।
स्पीक अप
फैसला आने पर हमें यह उम्मीद बढ़ी है कि हमारी पट्टे की जमीन हमें फिर से वापस मिलेगी। हम लोगों ने भूखे रहकर यह लड़ाई लड़ी। महीनों तक धरना स्थल पर डटे रहे। तब जाकर यह सफलता मिली है।
- रेशमा देवी, पट्टाधारक
-
19 वर्ष से हर तारीख पर हम लोग उम्मीद के साथ एसडीएम न्यायालय जाते थे। यह क्रम 14 अगस्त की सुनवाई से टूटा। अब हमारी बात सुनी जाएगी क्योंकि वह आदेश रद्द हो गया जिसके कारण जमीन छिनी थी।
-रामवृक्ष, पट्टा धारक।
वर्जन
सदर विकास खंड के तेंदुअहिया में पट्टा धारकों की लड़ाई हमने संगठन के साथ लड़ी। इसमें हमारी जीत हुई है। प्रशासन को उस पर भी कार्रवाई करनी चाहिए जिसने कूटरचित पावर ऑफ अटॉर्नी अभिलेख से पट्टा छीनने का काम किया।
-राम अशीष, जिलाध्यक्ष, भाकियू महराजगंज।
न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला दिया। जिस अभिलेख के सहारे पट्टा धारकों की जमीन पर कोई अन्य व्यक्ति काबिज हुआ। जब वह अभिलेख रिकॉर्ड रूम में नहीं है तो किस आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी के तहत जमीन सुपुर्द किया गया। इसी के तहत मई 2009 का फैसला निरस्त कर संबंधित को नोटिस का आदेश न्यायालय से जारी किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।
-अवनीश त्रिपाठी,एसडीएम सदर महराजगंज।