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पल्स ऑक्सीमीटर खरीद में गोलमाल की आशंका

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पल्स ऑक्सीमीटर खरीद में गोलमाल की आशंका
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तीन लाख रुपये से अधिक के सामान की सप्लाई के लिए नहीं हुआ टेंडर
एक फर्म से खरीद कर प्रधानों को दे दिया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
निचलौल। विकास खंड क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में अभी महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) सहित अन्य कार्यों में धांधली का मामला ठंडा नहीं हुआ है। इसी बीच थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर खरीद में गोलमाल की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। क्षेत्र की 108 ग्राम पंचायतों में थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर प्रधानों को मिले हैं।
चर्चा है कि तीन लाख रुपये से अधिक के समान की सप्लाई के लिए जिम्मेदारों द्वारा टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। एक ही कंपनी से समान की सप्लाई कर प्रधानों को दे दिया गया। अब प्रधान व सचिव असमंजस हैं की बगैर कोटेशन या टेंडर के वे इतनी बढ़ी रकम का भुगतान कैसे करें। भुगतान कर भी दें तो किस तरह से अभिलेखों में दर्शाएं। यही कारण है कि उपकरण वितरण के दो माह बाद भी महज 15 ग्राम पंचायतों ने 2800 रुपये की दर से भुगतान किया है। एडीओ पंचायत रामनाथ ने बताया कि एक लाख से ऊपर के सामान की खरीदारी के लिए टेंडर होता है। उपकरण वितरण में टेंडर की जानकारी ग्राम सचिव देंगे। उपकरण की रकम का भुगतान बिल, बाउचर के आधार पर संबंधित फर्म के नाम से होना है। अभी तक 15 ग्राम पंचायतों ने उपकरण का भुगतान कर दिया गया है।
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तो क्या बगैर टेंडर ही 3.2 लाख के बंटे उपकरण
ग्राम प्रधानों ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए कहा है कि थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर को आनन-फानन सभी ग्राम पंचायतों में सप्लाई कर दिया गया। इस उपकरण की किस कंपनी से खरीद की गई है और इसका कितना भुगतान करना है। यह सब की जानकारी उन्हें नहीं है। 3.2 लाख रुपये की लागत से हुई उपकरण खरीद मामले में टेंडर प्रक्रिया न अपनाने पर गोलमाल की आशंका व्यक्त की जा रही है। रकम भुगतान के बारे में अधिकांश पंचायत सचिव को डर सता रहा है कि भुगतान कर दिए तो आगे जांच में फंस न जाएं।
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