- सर्पदंश से एक की हो चुकी है मौत
निचलौल। महराजगंज के तराई क्षेत्र में बरसात के मौसम में सर्पदंश का खतरा बढ़ गया है। बीते छह माह में निचलौल क्षेत्र के 37 लोग सर्पदंश का शिकार हो चुके हैं। इनमें से एक की मौत तक हो चुकी है।
खेतों और निचले स्थानों में पानी भरने के कारण सांप सूखे स्थानों, खेतों की मेड़ों, कूड़े-कचरे, घरों के अंधेरे कोनों और मवेशियों के आश्रय स्थलों में छिप जाते हैं। ऐसे में खेतों में काम करने और चारा निकालने के दौरान सर्पदंश की घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के परियोजना प्रमुख अरशद हुसैन के अनुसार, महराजगंज के तराई क्षेत्र में कोबरा, करैत और रसेल वाइपर जैसे जहरीले सांप पाए जाते हैं। बरसात में इनके प्राकृतिक आश्रयस्थलों में पानी भरने से ये सुरक्षित और सूखे स्थानों की तलाश में निकलते हैं।
जून से सितंबर तक 31 मामले
सीएचसी निचलौल में अप्रैल से 21 सितंबर के बीच सर्पदंश के 37 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें अप्रैल में दो, मई में चार, जून में छह, जुलाई में 11, अगस्त में सात और सितंबर के 21 तारीख तक सात लोगों को सर्पदंश के बाद एंटीवेनम देकर उपचार किया गया। इसके अलावा सर्पदंश की आशंका में करीब 77 लोगों का इलाज किया जा चुका है।
सतर्कता बरतने की सलाह
अरशद हुसैन ने बताया कि खेतों की मेड़ों पर चलते समय डंडे से घास को हिलाकर देखना चाहिए। कूड़े-कबाड़ की सफाई और चारा निकालते समय सावधानी बरतें। अंधेरे स्थानों पर बिना रोशनी के नहीं जाएं। सीएचसी के वरिष्ठ फिजिशियनय डॉ. मनीष खन्ना ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचकर उपचार कराएं। झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने पर जान तक गंवानी पड़ सकती है।