बेलसड़-रिगौली बांध के रेनकट व रैट होल से बिगड़ सकते हैं हालात
भुवही घाट के निकट बांध से दो मीटर ही दूर है राप्ती का कटान
24 गांव की 50 हजार से अधिक की आबादी
महराजगंज/धानी। बलरामपुर के बाद सिद्धार्थनगर जिले में बढ़ती राप्ती नदी धानी विकास खंड के 24 गांवों के 50 हजार से अधिक ग्रामीणों की नींद उड़ाए हुए है। राप्ती से सुरक्षा के लिए 10 किमी बेलसड़-रिगौली बांध तो है लेकिन रेन कट और रैट होल ने उसे कमजोर कर दिया है। अगर इसी तरह से राप्ती नदी बढ़ती रही तो रिगौली बांध इससे सटे करीब 24 गांवों के लिए तबाही का सबब बन सकता है।
जानकारी के अनुसार, जनपद में नदियों से अभिसिंचित क्षेत्र पड़ोसी जिलों से अधिक हैं। नेपाल के साथ-साथ पड़ोसी जिलों से जनपद में दाखिल हो रही नदियों के वेग से कृषि क्षेत्र व आबादी महफूज रखने के लिए सभी तटबंधों को दुरुस्त रखने के निर्देश जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने लगभग एक माह पहले जारी किए थे। उनके निर्देश पर सभी बांधों की मजबूती बढ़ाने व कटान रोकने के लिए व्यापक व्यवस्था की गई लेकिन राप्ती नदी से सुरक्षित रखने के लिए बने बेलसड़-रिगौली बांध पर कोई कार्य या सुधार इंतजाम नहीं किए गए।
धानी में अभी तो राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है लेकिन पड़ोसी जिलों में बढ़ते जलस्तर के मद्देनजर अगर नदी धानी में बढ़ती है तो बेलसड़-रिगौली बांध के रेनकट व रैट होल के कारण एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतें बाढ़ की चपेट में आ सकती हैं। इस बांध की मरम्मत 2000 में आई बाढ़ के बाद कराया गया लेकिन लंबे अर्से से मरम्मत व कटान रोधी कार्य व रेनकट व रैट होल नहीं भरे गए हैं।
सिद्धार्थनगर व गोरखपुर जनपद के बीच है जिले का बेलसड़-रिगौली बांध
राप्ती नदी के वेग से धानी के लगभग 22 ग्राम पंचायतों की सुरक्षा के लिए बेलसड़-रिगौली बांध सिद्धार्थनगर व गोरखपुर जिले के बीच लगभग 10 किमी भूभाग पर है। बृहस्पतिवार को बांध की पड़ताल में नदी का जलस्तर तो नीचे दिखा लेकिन रैट होल, रेनकट व नदी की कटान आदि दिखाते हुए बांध से सटी पंचायतों के लोग सशंकित दिखे।
ग्राम पंचायत कानापार, धानी गांव, चौका, घीवपीड़, बेलसड़, सिकंदरा जीतपुर और बरगदवा के कन्हैया भारती, कन्हैया यादव, रामदयाल चौहान, सुनील कुमार व अन्य ने बताया कि पहाड़ों की बारिश के कारण बलरामपुर जनपद में चार दिन से राप्ती बढ़ रही है। अगर यही स्थिति यहां उत्पन्न हुई तो फसलों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर ग्राम पंचायतें प्रभावित होंगी। 2000 में यह बांध 50 मीटर तक कट गया था तब लगभग 15 दिन तक ग्राम पंचायतों में पानी भरा रहा गया था। हम लगभग 15 दिन तक बांध पर रहे। इस बार ऐसी स्थिति न उत्पन्न हो इसे लेकर प्रयास होना चाहिए था लेकिन इस वर्ष रेनकट व रैट होल नहीं भरे गए। ऐसे में भय है कि 2000 के जैसे हालात से न जूझना पड़े।
स्पीकअप
बेलसड़-रिगौली बांध पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से पक्की सड़क बनाकर मजबूती देने के प्रयास हुए हैं। लेकिन बोल्डर की पिचिंग पूरे बांध पर न कराकर सिर्फ कुछ ही स्थानों पर कराया गया है। इससे तटवर्ती पंचायतों में राप्ती नदीं का जलस्तर बढ़ने की दशा में बाढ़ आना तय है।
-प्रदीप कुमार, सभापति बेलसड़, बी पैक्स, महराजगंज।
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बेलसड़-रिगौली बांध सपा सरकार के समय बनवाया गया था। मेरे कार्यकाल में इस बांध की मरम्मत समय पर होती थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों से जनप्रतिनिधि व सिंचाई विभाग के ध्यान न देने से रेट होल, रेन कट व कटान स्थल बांध को असुरक्षित बना रहे हैं।
-महबूब आलम, पूर्व ब्लॉक प्रमुख, धानी, महराजगंज।
वर्जन
जनपद से होकर गंडक, रोहिन, प्यास, चंदन, छोटी गंडक के अलावा राप्ती नदी से सुरक्षा के लिए बने बांधों को सुरक्षित रखने के इंतजाम के लिए सिंचाई विभाग को निर्देश दिए जा चुके हैं। अगर रिगौली-बेलसड़ बांध पर इसकी अनदेखी हुई है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी और बांध को सुरक्षित कराया जाएगा।
-डॉ. प्रशांत कुमार, एडीएम, महराजगंज।