महराजगंज के सिविल कोर्ट में सोमवार की शाम करीब तीन बजे उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब 21 वर्ष पुराने हत्या के मामले में हत्यारोपितों के पक्ष में निर्दोष होने का न्यायिक निर्णय आया। वादी मुकदमा के परिजनों के हवाले से यह जानकारी मिली की थाना पनियरा क्षेत्र के मौलागंज निवासी कन्हैया पहलवान की 24 जुलाई 2005 को कोतवाली थाना क्षेत्र में चेहरी स्थित बलिया पुल के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
मृतक कन्हैया पहलवान के पिता राम अवध यादव की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना के पश्चात सात आरोपितों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय समक्ष प्रस्तुत किया। मुकदमें के परीक्षण के दौरान सात आरोपितों में से चार आरोपितों की मृत्यु हो गई। न्यायालय ने साक्ष्यों, गवाहों का परीक्षण कर शेष तीन हत्यारोपितों को निर्दोष होने का न्यायिक निर्णय सुनाया।
मृतक कन्हैया पहलवान के फौजी भाई लक्ष्मण यादव तथा पुत्र टूटू यादव न्यायालय के न्यायिक निर्णय से हताश होकर न्यायालय परिसर स्थित एक पीपल के पेड़ पर चढ़ गए, जिससे वादी मुकदमा के परिजनों तथा पुलिस प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई तथा अधिवक्ताओं व मुवक्किलों की वहां भीड़ जुट गई।
घटनास्थल पर तहसीलदार पंकज शाही, नायब तहसीलदार देश दीपक त्रिपाठी पुलिस बल व क्रेन के साथ पहुंचकर किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए मुस्तैद रहे। अधिवक्ताओं द्वारा न्यायिक निर्णय के विरुद्ध अपील के विकल्प को समझाने पर मृतक का बेटा टूटू यादव पेड़ से उतर आया। लेकिन क्रेन को अपनी तरफ बढ़ता देख फौजी लक्ष्मण यादव ने पेड़ से छलांग लगा दिया।