अड्डा बाजार। क्षेत्र के गांव चंडीथान देवी मंदिर परिसर में नारद मोह मंचन से रामलीला आरंभ हुआ। रामलीला कलाकारों ने मंचन किया कि नारद की तपस्या से इंद्रासन डगमगाने लगता है। डरे हुए देवराज इंद्र की मंशापूर्ण करने अप्सराओं के साथ कामदेव नारद के पास पहुंचे।
नारद के सामने कामदेव हार मानकर नतमस्तक हो गए, जिससे नारद को अहंकार हो गया। भगवान विष्णु ने नारद का अहंकार खत्म करने के मकसद से एक माया नगरी की रचना की। वहां की राजकुमारी विश्व मोहिनी को देखकर नारद मोहित हो गए। उनसे विवाह करने की चाहत उभर आई।
राजा शीलनिधि के मुख से राजकुमारी विश्वमोहिनी के स्वयंवर की घोषणा सुनकर नारद जी भगवान विष्णु के शरण में गए और उनसे सुंदर हरि रूप शक्ल मांगा। छीर सागर से लौटकर नारद जी नया शक्ल में स्वयंवर के बीच पहुंचे। वरमाला लेकर चल रही विश्व मोहिनी के सामने बार-बार पहुंचने की कोशिश करते। अंत में नारद जी के सामने ही विश्व मोहिनी ने भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल दी। संवाद