महराजगंज। मिठौरा की रामकटोरी मिठाई की धाक लगभग एक दशक से बनी हुई है। इस मिठाई का स्वाद ही शायद कुछ ऐसा है कि विदेशी भी इसके दीवाने हैं। सामान्य दिनों में भी इस मिठाई की औसत बिक्री 50 से 60 किलो प्रतिदिन होती है।
दीपावली, दशहरा, ईद, भैया दूज और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों में बिक्री 300 से 400 किलो प्रतिदिन पहुंच जाती है। रक्षाबंधन को लेकर रामकटोरी की बिक्री और बुकिंग अभी से शुरू हो गई है। िउंटहा कस्बे में चने का छोला तो मुख्यालय का भुना मटर मिक्चर स्वाद के सहारे लोगों को अपनी ओर खींचते हैं। मिठौरा कस्बे में महेंद्र की रामकटोरी की धाक भी कुछ ऐसी ही है। 300 रुपये किलो की दर से बिकने वाली रामकटोरी मिठाई अलग तरह की मिठास देती है। रक्षाबंधन नजदीक आने के साथ-साथ इसकी बिक्री का ग्राफ बढ़ रहा है।
बुधवार को दोपहर 2 बजे तक 80 किलो रामकटोरी की बिक्री हो चुकी थी। रक्षाबंधन तक बिक्री 5 क्विंटल तक पहुंचने की उम्मीद है।
पूरा परिवार मिलकर करता है तैयार : रामकटोरी महेंद्र का पांच सदस्यीय परिवार मिलकर बनाता है लेकिन सामग्री व मात्रा का निर्धारण 60 वर्षीय महेंद्र ही करते हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 10 वर्ष पहले भगवान राम का नाम लेकर निर्माण शुरू किया था।
तब रेट 250 रुपये किलो से अब 300 तक पहुंचा चुका है। मिठाई में प्रयुक्त खोआ वनटांगिया नर्सरी की महिलाएं पहुंचाती हैं। एक किलो रामकटोरी में लगभग 200 ग्राम खोआ का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें सिर्फ केवड़ा जल व छोटी इलायची, 250 ग्राम पिसी चीनी का उपयोग किया जाता है। मैदा हल्का भूनकर उबले पानी में हल्के देसी घी के प्रयोग से मोयन बनाया जाता है। इसे कटोरी आकृति देकर खोआ मिश्रण उसमें भरते हैं।