महराजगंज। पूर्वी यूपी के तराई का मौसम बदल गया है। सोमवार की सुबह से डेरा डाले बादल मंगलवार भोर में बरस पड़े। बेमौसम हुई बारिश ने जहां तापमान को लुढ़काने का कार्य किया, वहीं किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खिंच गई हैं। इस बार 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि पर हुई धान की रोपाई जनपद में अभी 10 फीसदी भी नहीं कटी है।
ऐसे मौसम में बारिश होना कृषि विभाग के मुताबिक उत्पादन का ग्राफ गिरा सकता है। सोमवार तक अधिकतम तापमान 30 व न्यूनतम 25 रहा। मंगलवार को 27 और 24 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक 31 अक्तूबर तक जिले में बारिश के आसार बने रहने वाले हैं।
खरीफ के सीजन में मौसम की बेरुखी झेल चुके किसानों की गाढ़ी कमाई सुरक्षित घर तक पहुंचेगी। इसे लेकर मौसम विभाग की तरह से आशंका जताई जा रही है। इस बार मानसून न सिर्फ समय से पहले पूर्वी यूपी में पहुंचा, लेकिन मेहरबानी पश्चिमी यूपी पर अधिक रही। मानसून वापसी के दौरान पूर्वी यूपी की तराई में मेघ मेहरबान हुए। अक्तूबर में ठंड का अहसास इसी के चलते महसूस किया जाने लगा, जिसे प्रति वर्ष नवंबर में महसूस किया जाता था।
खाद की किल्लत व अन्य कारणों से इस बार जनपद में धान की फसल लेट से होने के कारण अभी खेत में है। कृषि विभाग के मुताबिक अभी फसल कट कर घर तक पहुंचने में लगभग 15 दिन का समय लगेगा, ऐसे समय मौसम की खराबी ने किसानों की बेचैनी बढ़ाने का कार्य किया है।
कटाई करा चुके किसान सुखा रहे नमी :प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध चौधरी ने बताया कि उनकी कुछ धान की फसल कट कर घर पहुंच चुकी है, लेकिन अभी फसल में नमी अधिक होने के कारण सुखाने का कार्य चल रहा था। ऐसे में खराब मौसम समस्या उत्पन्न कर रहा। खेत की फसल भी दो चार दिन में काटने लायक होगी। अगर ऐसे समय बारिश होगी तो कटाई का समय और बढ़ेगा। इसके अलावा फसल गिरने से उपज भी प्रभावित होगी।