रहुनमा भारत के, इलाज कराते हैं नेपाल
सीमा से सटे सोनौली के मरीजों को भाता है नेपाल का मेडिकल कॉलेज
वर्ष 2020 में पीएचसी धौरहरा का हुआ था उद्घाटन, सुविधाओं का टोटा
महराजगंज। सोनौली कस्बे के पीएचसी धौरहरा में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यहां के मरीजों को नेपाल के मेडिकल कॉलेज का सहारा है। खासकर गंभीर मरीज भैरहवां मेडिकल कॉलेज का रुख कर लेते हैं। पीएचसी में सिर्फ फार्मासिस्ट मिलते हैं। डॉक्टर के आने-जाने का समय नहीं है।
पड़ताल में पता चला पीएचसी धौरहरा पर करीब 35 हजार की आबादी के इलाज की जिम्मेदारी है। बदहाल व्यवस्था से मरीजों को प्राइवेट डॉक्टरों या फिर नौतनवां, रतनपुर के सरकारी अस्पतालों के साथ नेपाल के मेडिकल कॉलेज का चक्कर काटना पड़ता है। नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि शिवम त्रिपाठी ने बताया कि पीएचसी की नींव 2016 में रखी गई थी। 2020 में उद्घाटन हुआ था। पीएचसी में एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति है। अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को परेशानी होती है। जिम्मेदार इस समस्या पर गंभीर नहीं हैं। कस्बे के सुनील त्रिपाठी, संजय चौरासिया, प्रेम सिंह, सुग्रीम का कहना है कि डॉक्टर का दर्शन ही नहीं होता है। फार्मासिस्ट दिलीप कुमार अग्रहरि ने बताया कि निर्धारित समय पर पीएचसी प्रत्येक दिन खुलता है। यहां आने वाले मरीजों को दवा दी जाती है। एक एकड़ में बने पीएचसी में वार्ड ब्वॉय, स्वीपर, स्टाफ नर्स, दाई की नियुक्ति नहीं हुई है। कर्मचारियों के लिए एक करोड़ 61 लाख की लागत आवास बना है। अस्पताल के सभी उपकरण जंग खा चुके हैं। परिसर में घास-फूस उग आए हैं।
डिप्टी डॉ. आईए अंसारी ने बताया कि दायित्व के प्रति लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी डॉक्टरों को अस्पताल में समय से उपस्थित रहने का निर्देश हैं। अगर ऐसी बात है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।