महराजगंज/निचलौल। दो मासूम बेटियों की हत्या की खबर से शहर के घोड़हवा वार्ड में सनसनी फैल गई। जिसने भी जघन्य कृत्य को सुना उसने मां को कोसा। इसी बीच जान देने की कोशिश करने वाली मां साक्षी का लिखा एक सुसाइड नोट मिला। उसमें लिखा कि उसकी मौत के बाद दोनों बेटियां अनाथ हो जातीं... इसलिए दोनों की हत्या कर खुद जान देर रही हूं। घटना की जिम्मेदारी मेरी है। पुलिस प्रशासन मेरे परिजनों को परेशान न करे।
पुलिस के अनुसार, अन्नू उर्फ साक्षी के कमरे से एक कॉपी बरामद हुई। कॉपी के अंदर ढाई पन्ने में उसने सुसाइड नोट लिखा। सुसाइड नोट के मुताबिक मोबाइल फोन चलाते समय स्क्रीन पर छोटी सी हरे रंग की लाइट जलती है। लगता है कि कोई मेरा पीछा कर रहा है। इसे लेकर काफी दिनों से परेशान रहती हूं। पीछा छुड़ाने की कोशिश भी की लेकिन असफल साबित हुई। बकौल साक्षी, पति हमसे बहुत प्यार करते हैं। मैं भी उनसे काफी प्यार करती हूं, लेकिन कभी भी उनके लिए सज-धज नहीं पाती हूं। मैं आत्महत्या करना चाहती हूं, लेकिन मेरे मरने के बाद दोनों मासूम बेटियां अनाथ हो जाएंगी। इसलिए पहले दोनों की हत्या करने के बाद आत्महत्या करूंगी। पूरी घटना की जिम्मेदारी मेरी है। मौत के बाद मेरे पति और परिजन को पुलिस प्रशासन परेशान न करे... इसलिए सुसाइड नोट लिख रही हूं।
क्षेत्राधिकारी अनुज कुमार सिंह ने कहा की मौके से मिले सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर सील कर दिया गया है। सुसाइड नोट के अलावा अन्य कई बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है।
मौके पर पहुंची दो सदस्यीय फॉरेंसिक टीम में शामिल मनीष गुप्ता के मुताबिक कमरे की गहनता से जांच की गई। घटना की सबसे पहले जानकारी देने वाली शिखा सहित आसपास के अन्य लोगों से भी पूछताछ की गई। उसके बाद हत्या में शामिल चाकू, फिंगर प्रिंट सहित साक्ष्य लिए गए।
लोगों के मुताबिक साक्षी के पति अमन विश्वकर्मा मूलरूप से कोठीभार क्षेत्र के रामपुरवा गांव के निवासी हैं। करीब 10 वर्ष पहले जमीन खरीदकर मकान बनवाया। फैजाबाद शुगर मिल में काम करने वाले अमन पत्नी साक्षी के साथ आकर रहने लगे। अमन की भांजी शिखा (13) उनके साथ रहकर शहर के एक विद्यालय में पढ़ती है। अमन के दो भाई आकाश और रोहित दिल्ली में रहते हैं। पिता राजनाथ विश्वकर्मा हरिद्वार में रहते हैं।
घटना के बाद वार्ड की महिलाओं के बीच कई तरह की चर्चाएं होती रहीं। बताया कि साक्षी लोगों से कम ही बातचीत करती थी। उसके चेहरे पर भी मुस्कान नहीं रहती थी। उसे देखने पर लगता था कि वह किसी सोच में डूबी है।
स्कूल से चाकलेट लेकर लौटी थी शिखा
अपेक्षा और आरोही के शव देख शिखा काफी देर तक बदहवास रही। लोगों के काफी-समझाने बुझाने के बाद कुछ बता सकी। शिखा ने बताया कि दोनों उसी के साथ रहती थीं। स्कूल से घर आने के साथ खेलती थीं। मैं भी दोनों छोटी बहनों से खूब प्यार करती थी। अक्सर स्कूल से लौटते समय कुछ लेकर आती थी। बुधवार को दोनों बहनों के लिए चाॅकलेट लेकर आई थी।
कमरे की दृश्य देख पुलिस टीम के रोंगटे खड़े हो गए। दोनों बेटियों को मां ने बेरहमी से मारा था। शिखा ने बताया कि वह घर का मुख्य दरवाजा न खुलने पर छत के रास्ते मामी के कमरे के पास पहुंचकर आवाज लगाई। अंदर से कोई आवाज नहीं आई। फिर कुछ देर खड़ी हुई, तो मामी की कराहने की आवाज सुनाई दी। फिर सीढ़ी पर चढ़कर खिड़की से कमरे में देखा तो वह सन्न हो गई। कमरे में चारों तरफ खून पसरा था। खून के छींटे दीवारों पर भी थे।
अंतर्निहित मानसिक स्वास्थ्य स्थिति या गंभीर परिस्थितियां अक्सर ऐसी भयानक घटनाओं का कारण बनती हैं। बच्चे की देखभाल से गुजर रही माताएं अक्सर अवसाद में चली जाती हैं। कभी-कभी वे आत्महत्या के बारे में भी सोचती हैं। अक्सर बच्चे के भाग्य के बारे में चिंतित रहने लगती हैं। यह सोच उन्हें ऐसे ही कार्यों की ओर धकेलता है। इस आत्मघाती कदम को विस्तारित आत्महत्याएं कहा जाता है। इसमें बच्चे को मां के विस्तार के रूप में देखा जाता है। ऐसे मामलों में अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों को अक्सर प्राथमिक कारकों के रूप में माना जाता है। इसलिए, ऐसे मामले जहां माताएं अपने बच्चों को मार देती हैं, उनका मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन और इलाज किया जाना चाहिए।
-डॉ. आशुतोष दास, मनोचिकित्सक, केएमसी मेडिकल काॅलेज एंड हास्पिटल