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Maharajganj News: हर साल किताबें और ड्रेस बदलकर अभिभावकों का शोषण कर रहे निजी स्कूल

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कलक्ट्रेट परिसर में सौंपा ज्ञापन, निजी विद्यालयों पर कार्रवाई की मांग की
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महराजगंज। कलक्ट्रेट परिसर में सोमवार को नेशनल मानवाधिकार चेतना संगठन के पदाधिकारियों ने सोमवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान पदाधिकारियों ने निजी विद्यालयों में शिक्षा के नाम पर हो रही लूट पर कार्रवाई की मांग की है।
जिलाध्यक्ष नीरज कुमार ने बताया कि अधिकांश निजी स्कूलों में दो प्रमुख समस्याएं अभिभावकों के लिए शोषणकारी बन गई हैं। पहली समस्या किताबों के नाम पर लूट है। स्कूल एनसीआरटी या मानक पुस्तकों की बजाय हर वर्ष महंगी, अनावश्यक और मनमानी किताबें थोप रहे हैं। किताबों का सेट बदल दिया जाता है और अभिभावकों पर चुनिंदा दुकानों से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है। दूसरी समस्या हर वर्ष ड्रेस बदलने की मनमानी है।
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स्कूल लगभग हर सत्र में ड्रेस का रंग, डिजाइन या पैटर्न बदल देते हैं, इससे पुरानी ड्रेस अनुपयोगी हो जाती है। ड्रेस भी एक ही दुकान से खरीदने को बाध्य किया जाता है। संगठन के जिला संयोजक सन्नी कुमार दुबे ने शिक्षा को व्यापार बनाने की निंदा की। उन्होंने मांग की कि सरकारी मानक किताबों के अलावा महंगी किताबें अनिवार्य करने पर तुरंत रोक लगाई जाए। हर वर्ष ड्रेस बदलने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और एक ड्रेस को न्यूनतम 3-5 वर्ष तक अनिवार्य किया जाए। किताब व ड्रेस किसी एक दुकान से खरीदने की बाध्यता समाप्त की जाए।
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सभी स्कूल किताबों एवं ड्रेस की स्पष्ट लिखित सूची सार्वजनिक करें। इसके अलावा जिला स्तर पर जांच समिति गठित की जाए जिसमें अभिभावक प्रतिनिधि भी शामिल हों। नियम उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो और अभिभावकों के लिए गोपनीय शिकायत तंत्र लागू किया जाए। ज्ञापन देने के दौरान प्रदीप कुमार, पप्पु, बृजेश, गिरजाशंकर विश्वकर्मा, सतीश पांडेय, श्रीराम, राजकुमार, विनय मौजूद रहे।
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