लक्ष्मीपुर खुर्द बार्डर पर बरामद तस्करी की धूप लकड़ी।
महराजगंज। बार्डर क्षेत्र में झाड़ी में बरामद हुई धूप की लकड़ी को तस्कर गुजरात भेजने की फिराक में लगे थे। सुरक्षा कर्मियों को समय से इसकी भनक लगी तो त्वरित छापेमारी की गई। इसके बाद बरामदगी हुई। लकड़ी कौन ले जा रहा था इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। तस्कर मौके से फरार हो गए थे। सुरक्षा एजेंसियां मौके से भागे हुए तस्करों के बारे में जानकारी हासिल करने में जुटीं हैं।
सूत्रों के अनुसार, तस्कर नेपाल के चितवन जंगल से धूप की लकड़ी लाकर भारतीय क्षेत्र में बड़े शहरों में भेजते हैं। इसकी बरामदगी तभी होती है, जब इनके सिंडिकेट का कोई कैरियर बगावत करता है। उसकी ओर से सूचना सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचा दी जाती है तो बरामदगी होती है। धूप की लकड़ी की तस्करी कभी नदी क्षेत्र से तो कभी पगडंडी से की जाती है। इन दिनों सुरक्षा कर्मियों ने बार्डर क्षेत्र में विशेष निगरानी शुरू कर दी है तो तस्करों में हड़कंप मच गया है। बीते दिन 4.75 क्विंटल धूप की लकड़ी को बरामद हुई थी। संबंधित तस्करों के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।
नेपाल का चितवन जंगल हरा भरा होने के साथ ही जैव विविधता से भरपूर है। जंगल में वन्य जीव के साथ ही कीमती लकड़ियां भी हैं। यह जंगल भारत-नेपाल बाॅर्डर को भी छूता है। इसका फायदा दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में बैठे धंधेबाज उठा रहे हैं। तस्कर मोटी रकम कमाने के चक्कर में जंगल से धूप की लकड़ी की तस्करी कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा रहे हैं। धूप की लकड़ी की मांग भी अधिक होती है। यह लकड़ी हवन-पूजन में प्रयोग की जाती है। इस सिंडिकेट में दोनों देशों में बैठे बड़े बड़े धंधेबाज जुड़े हैं। जो बार्डर पर तस्करी के इस खेल को कैरियरों की मदद से अंजाम दे रहे हैं। नेपाल से आने वाली धूप की लकड़ी को प्रदेश के बड़े शहरों के साथ ही बिहार और गुजरात की मंडियों में भेजा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, नेपाल के चितवन जंगल से धूप की लकड़ी काटकर धंधेबाज सीमावर्ती इलाकों में छिपा देते हैं। फिर लकड़ी को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके बोरे में भर देते हैं। इसके बाद बाॅर्डर के पगडंडी रास्तों से बोरे साइकिल से सरहद पार कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा दिए जाते हैं।