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जननी सुरक्षा योजना से गर्भवती महिलाओं का मोहभंग
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महराजगंज। शासन की ओर से तरह-तरह के लाभ दिए जाने के बाद भी गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने में रुचि नहीं ले रही हैं। पिछले वर्ष के अप्रैल की तुलना में इस वर्ष अप्रैल में सरकारी प्रसव इकाई पर जननी सुरक्षा योजना के लाभार्थियों की संख्या घट गई है। पिछले वर्ष अप्रैल में 2,465 ने योजना के तहत लाभ लिया था। वहीं इस वर्ष अप्रैल में केवल 1821 गर्भवती महिलाएं ही शामिल हैं। ऐसे में इस वर्ष अप्रैल में 644 लाभार्थी कम हुई हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, उसके लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पांच हजार रुपये तीन किस्तों में दिए जाते हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस के तहत हर माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। वहीं, जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं के प्रसव के बाद उनके खाते में 1,400 रुपये भेजे जाते हैं, जिससे गर्भवती पौष्टिक आहार लेती रहे और किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके बाद भी जननी सुरक्षा योजना के तहत जिले में लाभार्थियों के संख्या पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम हो गई है। अप्रैल 2022 में सरकारी प्रसव इकाई पर कुल 3,314 गर्भवती महिलाओं के संस्थागत प्रसव व जननी सुरक्षा योजना के तहत लाभ दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए सभी सीएचसी के अधीक्षकों को जरूरी निर्देश दिए गए थे, लेकिन सभी प्रसव इकाई को मिलाकर केवल 1,821 गर्भवती महिलाओं के संस्थागत प्रसव हुए हैं। वर्ष 2021 के अप्रैल माह में कुल 2,465 गर्भवती महिलाओं ने सरकारी अस्पतालों पर संस्थागत प्रसव कराते हुए जननी सुरक्षा योजना का लाभ लिया था।
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सरकारी अस्पतालों में अधिक से अधिक संस्थागत प्रसव हो और गर्भवती महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिल सके, इसके लिए सभी सीएचसी अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं। जिन अस्पतालों पर संस्थागत प्रसव की प्रगति खराब है, वहां सुधार लाने की चेतावनी दी गई है।
- डॉ. राकेश कुमार, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी
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